दया सबसे बड़ा धर्म-सौम्ययशा श्रीजी
दया सबसे बड़ा धर्म-सौम्ययशा श्रीजी मनासा। महापुरुषों ने दया को धर्म का मूल कहा है तथा अभिमान को पाप का मूल माना है। प्राणी मात्र के प्रति दया का भाव रखना ही सबसे बड़ा धर्म है। हिंसात्मक भाव का दमन ही दया है। दया धर्म को प्रत्येक सम्प्रदाय ने बड़ा महत्व दिया है। किसी की […]
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