पति पत्नी के बीच आपसी सामंजस्य होना चाहिए – स्वामी श्री सत्यव्रत चैतन्य जी
मंदसौर। पुरूषोत्तम (अधिक) मास के अवसर पर केशव सत्संग भवन, खानपुरा में पुरूषोत्तम (अधिक) मास के शुभ अवसर पर पूज्य पाद स्वामी श्री सत्यव्रत चैतन्य जी नर्मदा तट द्वारा रामचरित मानस का वाचन 1 जून से प्रारंभ किया गया है जो 15 जून तक प्रतिदिन प्रात: 8.30 बजे से 10 बजे तक कथा का वाचन करेंगे।
दिनांक 7 जून 2026, रविवार को रामचरित मानस शास्त्र का वाचन करते हुए स्वामी श्री सत्यव्रत चैतन्य जी ने बताया कि भगवान श्री राम वनवास की ओर निकलते है तो पहला पड़ाव राजा निषादराज के यहां होता है निषादराज भगवान राम का स्वागत सत्कार करते है और अपना सबकुछ उन्हें देने की बात रखते है आजकल ऐसी मित्रता भी नहीं होती क्योंकि मित्रता में भी स्वार्थ आ गया। राजा निषाद भगवान की सेवा करते है और अब निकलने का समय होता है तो भगवान राम उन्हें कुछ भेंट देना चाहते है लेकिन उनके पास भेंट देने को कुछ नहीं होता माता सीता उनके भावो को समझ जाती है क्योंकि दोनो में आपसी सामंजस्य बहुत है। आज के पति पत्नी में ट्यनिंग की कमी देखने को मिलती है विश्वास नहीं करते इसलिए रिश्ते चल नहीं पाते रिश्तों में तालमेल और सामंजस्य होना बेहद आवश्यक है दोनों को एक – दूसरे के स्वभाव की जानकारी होना चाहिए। विशेषकर पति पत्नी के लिए भगवान राम और माता सीता का जीवन एक आदर्श उदाहरण है। भगवान राम के भावों को समझते हुए माता सीता राजा निषाद को भक्ति प्रदान करती है यह पाकर राजा निषाद भाव विभोर हो जाते है।
धर्मसभा में स्वामी जी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार हमारे जीवन में जो दोष हम करते है उन्हें हम भजन और भक्ति के माध्यम से सुधार सकते है। अपने दोषों को दूर करने का एक मात्र रास्ता है भक्ति इससे जीवन को उद्धार मार्ग पर लाया जा सकता है। अपनी सांसरिक इच्छाओं को त्यागकर भगवान में मन लगाने से प्रभु भक्ति की प्राप्ति होती है।

