सुख-शांति का मार्ग - आत्मिक जुड़ाव नरसीह अवतार

सुख-शांति का मार्ग – आत्मिक जुड़ाव नरसीह अवतार

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सुख-शांति का मार्ग – आत्मिक जुड़ाव नरसीह अवतार

कुकड़ेश्वर नगर से 6 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत पर मां शेरावाली के दरबार में श्रीमद् भागवत कथा के कथावाचक भागवत प्रवक्ता जयमाला वैष्णव दीदी-जी ने अपने मुखारविंद से कथा का रसपान करवाया जयमाला वैष्णव दीदी ने तृतीय दिवस की कथा नरसिंह अवतार कण कण मे परमात्मा का वास हर एक प्राणी मे ईश्वर को देखना
सनातन धर्म का पालन करे अपनाए यही परब्रह्म है सच्चा सनातनी जो सबका हित करे
सनातनी की पहचान

दूसरों का गला काट कर, दूसरों की संपत्ति का विध्वंश कर, दूसरों को लूट कर कोई महान नहीं बन सकता| जो दूसरों के विनाश में ही पूर्णता खोज रहे हैं, उन्हें कहीं भी सुख-शांति नहीं मिलेगी| पूर्णता की खोज में मनुष्य ने पूँजीवाद, साम्यवाद, समाजवाद, फासीवाद, सेकुलरवाद, जैसे अनेक वाद खोजे, और अनेक मत-मतान्तरों, पंथों व सम्प्रदायों का निर्माण किया| पर किसी से भी मनुष्य को सुख-शांति नहीं मिली| इन सब ने मनुष्यता को कष्ट ही कष्ट दिए हैं|
ऐसा करने वाला कभी ना तो सनातनी हो सकता ना देश भक्त हो सकता सर्व समाज समिति के आयोजक एवं समिति अध्यक्ष श्यामलाल रावत ने बताया कि कथा का रसपान ग्रहण करने वाले भक्तों का जन सैलाब उमड रहा है

पूर्णता तो निज आत्मा में है, कहीं बाहर नहीं| पूर्ण तो सिर्फ परमात्मा है जिस से जुड़ कर ही हम पूर्ण हो सकते हैं, दूसरों के गले काट कर नहीं|

जीवन मै शाति चाहते हो तो हरि भजन सत्संग मे मन को लगाओ

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