भक्ति, भजन और भगवान का नाम ही श्रीमद भागवत का सार : पं. प्रियांश राजपुरोहित
सात दिवसीय भागवत कथा का हवन, पूर्णाहुति एवं पोथी विसर्जन के साथ हुआ समापन
मंदसौर। जीवागंज स्थित पीपली माता मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन सोमवार अमावस्या के अवसर पर विधि-विधान से हवन एवं पूर्णाहुति के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिवस श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही और भक्तिमय वातावरण में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कथावाचक पं. प्रियांश राजपुरोहित ने कहा कि गुरुदेव द्वारा दिए गए चार-चार चनेदान (ज्ञानरूपी चने) केवल ज्ञान संचित करने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारकर आचरण में लाने के लिए प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति, भजन और भगवान का नाम ही श्रीमद्भागवत का सार है, जो मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। समापन अवसर पर मंदिर समिति अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार मोहन रामचंदानी, पूजा ईश्वर रामचंदानी, सोमलता जोशी, रेखा पुरोहित, रमाबाई एवं अनिता कोठारी सहित उपस्थित महिलाओं ने हवन में आहुतियां देकर पूर्णाहुति दी। इसके पश्चात महाआरती संपन्न हुई।
महाआरती के बाद ढोल-ढमाकों के साथ भव्य पोथी यात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए ऋषियानंद कुटिया पहुंची, जहां विधिवत पोथी विसर्जन किया गया। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

सात दिवसीय भागवत कथा का हवन, पूर्णाहुति एवं पोथी विसर्जन के साथ हुआ समापन
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