नवाचारों ने बदली शिक्षा की दिशा, बच्चों ने रचे सफलता के नए कीर्तिमान

नवाचारों ने बदली शिक्षा की दिशा, बच्चों ने रचे सफलता के नए कीर्तिमान

नीमच

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नवाचारों ने बदली शिक्षा की दिशा, बच्चों ने रचे सफलता के नए कीर्तिमान

नीमच , शासकीय प्राथमिक विद्यालय ढोलपुरा में किए गए नवाचारों का प्रभाव केवल विद्यालय की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला है। एक समय ऐसा था जब गांव में माध्यमिक स्तर की परीक्षाओं में भी अच्छे परिणाम दुर्लभ थे, वहीं आज इसी गांव के विद्यार्थी उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त कर रहे हैं।

          विद्यालय में वर्ष 2018 से प्रधानाध्यापक सिद्धूलाल पुरोहित द्वारा प्रारंभ किए गए नवाचारों, नियमित शैक्षणिक मार्गदर्शन, सामुदायिक सहभागिता एवं प्रेरणादायी गतिविधियों के परिणामस्वरूप आज गांव के लगभग 35 विद्यार्थी प्रदेश के उत्कृष्ट शासकीय शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत हैं।

          इनमें से 4 विद्यार्थियों का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ है, जबकि 28 विद्यार्थी सीएम राइज एवं उत्कृष्ट विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त गांव के 2 विद्यार्थी नीट एवं जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

         ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच भोपाल सिंह अहीर भी अनेक अवसरों पर यह बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि एक समय ऐसा था जब गांव में दसवीं कक्षा भी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी बहुत कम थे, लेकिन आज इसी गांव के बच्चे 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

यह परिवर्तन विद्यालय में लागू किए गए नवाचारों, विद्यार्थियों के प्रति शिक्षक की सतत प्रतिबद्धता, अभिभावकों के सहयोग तथा समाज की सहभागिता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। शिक्षा के क्षेत्र में यह उपलब्धि न केवल ढोलपुरा गांव बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

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शिक्षा, संस्कार और नवाचार का संगम

बाल गोपाल बैंक, माता-पिता पूजन दिवस, सांदीपनि पुरस्कार, सामुदायिक सहयोग, प्रतिभा सम्मान, जरूरतमंद विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहायता तथा बचत और संस्कार आधारित गतिविधियों ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण विकसित किया है। यही कारण है कि आज शासकीय प्राथमिक विद्यालय ढोलपुरा केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा परिवर्तन का एक सफल मॉडल बन चुका है, जिसकी चर्चा जिला स्तर से लेकर विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक मंचों तक हो रही है।

        “जहां कभी शैक्षणिक उपलब्धियां सीमित थीं, वहीं आज उसी गांव के विद्यार्थी नवोदय, सीएम राइज, उत्कृष्ट विद्यालय, नीट और जेईई जैसे उच्च शैक्षणिक लक्ष्यों की ओर अग्रसर हैं। यह परिवर्तन नवाचार, समर्पण और सतत प्रयासों की प्रेरक कहानी है।”

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