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*अजय जगदीश चंद्र चौधरी, अजेय योद्धा*
*नीमच। नीमच का दुर्भाग्य रहा है कि यहां वर्षों के संघर्ष के बाद कोई बड़ी सुविधा आती है, लेकिन उसके बाद राजनीति, प्रशासनिक फैसलों और निजी हितों के बीच उस सुविधा का मूल उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है। अब ऐसा ही सवाल नीमच के वीरेंद्र कुमार सखलेचा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय को लेकर खड़ा हो रहा है।*
*मेडिकल कॉलेज को PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित किए जाने की खबरों ने नीमच की चिकित्सा व्यवस्था के भविष्य को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मध्यप्रदेश के 9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को PPP मॉडल पर संचालित करने की तैयारी में नीमच का मेडिकल कॉलेज भी शामिल है।*
*अजेय योद्धा का सीधा सवाल—सरकारी मेडिकल कॉलेज को निजी हाथों में देने की जरूरत आखिर क्यों? यह मेडिकल कॉलेज कोई सामान्य इमारत या व्यावसायिक परियोजना नहीं है। इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, जनता की मांग, सरकारी धन और सार्वजनिक संसाधन जुड़े हैं। जिस संस्थान को जनता की जरूरत और सरकारी संसाधनों से खड़ा किया गया, उसके संचालन में निजी भागीदारी लाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? यदि PPP मॉडल जनहित में है, तो उसकी पूरी शर्तें, निजी भागीदार के अधिकार, शुल्क व्यवस्था, सरकारी नियंत्रण, गरीब मरीजों के उपचार की गारंटी और मेडिकल शिक्षा पर प्रभाव सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?*
*अजेय योद्धा का दूसरा सवाल—‘चासनी’ किसके लिए?*
*मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान के संचालन में करोड़ों रुपये का सवाल जुड़ा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि PPP व्यवस्था में आर्थिक लाभ का ढांचा क्या होगा और उसका वास्तविक लाभार्थी कौन होगा?क्या सार्वजनिक संसाधनों से तैयार संस्थान का संचालन निजी हाथों में जाने से आम मरीज को राहत मिलेगी या चिकित्सा व्यवस्था में व्यावसायिकता का प्रभाव बढ़ेगा?*
*पर्दे के पीछे कौन? जवाब दस्तावेजों से चाहिए*
*मेडिकल कॉलेज को लेकर राजनीतिक संरक्षण, निजी चिकित्सा हितों अथवा किसी कथित ‘मेडिकल लॉबी’ की भूमिका जैसी चर्चाएं भले ही उठ रही हों, लेकिन जब तक उनके समर्थन में ठोस दस्तावेज सामने न आएं, किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।*
*कहीं हाथ से न निकल जाए वर्षों का सपना!*
*नीमच ने मेडिकल कॉलेज के लिए लंबा संघर्ष किया। यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर चिकित्सा शिक्षा और उपचार व्यवस्था की उम्मीद है। आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी मेडिकल कॉलेज सरकारी ही रहेगा, या धीरे-धीरे उसके संचालन की कमान निजी हाथों में चली जाएगी? साथ ही जनता के संसाधनों से बने मेडिकल कॉलेज के भविष्य का फैसला पारदर्शिता से होगा या पर्दे के पीछे तैयार किसी ऐसी व्यवस्था से, जिसका असर आने वाले वर्षों में नीमच की चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ेगा?*
चिकित्सा माफिया के चंगुल से निकलने का अंतिम सपना भी दांव पर* *नीमच का मेडिकल कॉलेज निजी हाथों में सौंपने की तैयारी? सरकारी संसाधनों से खड़े संस्थान पर निजी हितों की नजर* *आखिर किसे लुभा रही है मेडिकल कॉलेज की ‘चाशनी’ और पर्दे के पीछे कौन निभा रहा है भूमिका?*
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