रतनगढ़। निकटवर्ती ग्राम गरवाड़ा में कैलाश जी मारू परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ सोपान में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जयपुर जौहरी बाजार से पधारे कथा व्यास संत श्री महंत राम झूलन दास जी महाराज ने कथा वाचन करते हुए कहा कि जहाँ निष्काम और अटूट प्रेमयुक्त भक्ति होती है, वहाँ भगवान स्वयं भक्त के वश में होकर चले आते हैं।
कथा के दौरान सूर्यवंश एवं चंद्रवंश के प्रसंगों का वर्णन करते हुए भगवान श्री राम और श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पूरा पांडाल मधुर संगीतमय भजनों और जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
कथा के प्रमुख आकर्षण एवं विचार:
वामन अवतार की सजीव झांकी: कथा के दौरान 4 वर्षीय बालक को वामन भगवान का रूप प्रदान किया गया, जिसे देख उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
समुद्र मंथन व नीलकंठ प्रसंग: गजेंद्र मोक्ष, राजा बलि एवं समुद्र मंथन का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए महाराज श्री ने बताया कि संसार की रक्षा हेतु महादेव ने विष पान किया और ‘नीलकंठ’ कहलाए।
सनातन संस्कृति की महत्ता: संत श्री ने आधुनिक दौर में खान-पान, रहन-सहन और पाश्चात्य शिक्षा के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि श्री राम हमें मर्यादित जीवन जीना सिखाते हैं, जबकि श्री कृष्ण निष्काम कर्म और मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं।
कथा के समापन पर भव्य महाआरती का आयोजन किया गया तथा आसपास एवं दूर-दराज से आए सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसादी की व्यवस्था की गई।
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