दलपतपुरा के जंगलों में भीषण आग, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
नीमच जिला के जीरन तहसील अंतर्गत ग्राम दलपतपुर और चीताखेड़ा के जंगलों में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने खुद ही आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया और साथ ही वन विभाग व स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी दी।
घटना की सूचना पर वन विभाग, स्थानीय पुलिस प्रशासन और वन संरक्षण समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड और पानी के टैंकर भी मौके पर पहुंचाए गए, लेकिन जंगल के अंदर रास्ता नहीं होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग तक नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में ग्रामीणों ने पानी के टैंकर और स्थानीय संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की।
ग्रामीणों का कहना है कि दलपतपुर के जंगलों में पिछले कई वर्षों से हर साल अप्रैल माह में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस आग से जंगल में रहने वाले कई वन्य जीवों की जान चली जाती है और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचता है।
फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश जारी है। वहीं, बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
वन अधिकारी से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि जंगल के अंदर लगने वाली यह आग नेचुरल नहीं है । यह आग रेवेन्यू क्षेत्र से जंगल तक पहुंची है। ये नेचुरल आग नहीं है जो प्राकृतिक आग लगती हैं वह अधिक ऊंचाई से पत्थर के लुढ़कने से पत्थर टकराने से लग सकती है बॉस के आपस में रगड़ होने से लगती है और यदि कोई इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट होता है तो ही जंगल के अंदर आग लगती है यह आग जंगल के अंदर नहीं लगी है यह जंगल के बाहर रेवेन्यू क्षेत्र में आग लगी थी जो हवा के साथ जंगल तक पहुंच गई है अभी आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है जीरन और नीमच से भी फायर ब्रिगेड बुलाई हैं लेकिन जंगल के अंदर फायर ब्रिगेड ज्यादा अंदर तक नहीं पहुंच पाती हैं। ग्रामीणों द्वारा ट्रैक्टर और दवाई छिड़कने की मशीन द्वारा पानी का छिड़काव कर आग को बुझाया गया।

