जीरन कृषि उपज मंडी में लहसुन उत्पादक किसानों से वैज्ञानिकों ने किया संवाद

जीरन कृषि उपज मंडी में लहसुन उत्पादक किसानों से वैज्ञानिकों ने किया संवाद

नीमच

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जीरन कृषि उपज मंडी में लहसुन उत्पादक किसानों से वैज्ञानिकों ने किया संवाद

कृषि संगोष्ठी कर,लहसुन में सेंटेड होना, काला पड़ना व हरा होने की समस्याओं पर हुई चर्चा

नीमच 11 मई 2026, कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के निर्देशानुसार जीरन कृषि उपज मंडी में सोमवार को लहसुन उत्पादक किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों द्वारा कृषक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

पृष्ठभूमि: उल्लेखनीय है, कि 30 अप्रैल को कलेक्टर श्री चंद्रा द्वारा जीरन कृषि उपज मंडी का निरीक्षण कर लहसुन शेड में किसानों से सीधे संवाद किया गया था। इस दौरान राजस्थान से आए किसान श्री बजेराम सहित अन्य लहसुन उत्पादकों ने लहसुन की गुणवत्ता प्रभावित होने, काली पड़ने, सेंटेड होने तथा भंडारण के बाद हरी होने जैसी समस्याओं से अवगत कराया था। कलेक्टर द्वारा किसानों को आश्वस्त किया गया था कि कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से इन समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान कराया जाएगा तथा रोग नियंत्रण एवं जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। साथ ही मंडी सचिव को किसानों की संगोष्ठी आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए थे।

वैज्ञानिकों से संवाद:  इसी क्रम में सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ.सी.पी. पचौरी, वैज्ञानिक पौध संरक्षण डॉ. श्याम सिंह सारंगदेवोत एवं आत्मा परियोजना के प्रभारी परियोजना संचालक डॉ. यतिन मेहता जीरन मंडी पहुंचे तथा किसानों से विस्तृत चर्चा की। किसानों ने लहसुन में इस वर्ष देखने को मिली विभिन्न समस्याओं जैसे सेंटेड होना, काला पड़ना, खुदाई के बाद हरा होना एवं अन्य रोगों से संबंधित समस्याएं रखीं। 

आगामी कार्ययोजना: वैज्ञानिकों ने किसानों को इन समस्याओं के संभावित कारणों की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी लहसुन बुवाई से पूर्व एक विस्तृत कृषक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें उत्पादन तकनीक, रोग प्रबंधन, भंडारण एवं गुणवत्ता सुधार पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया जाएगा।

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     वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी आश्वस्त किया कि लहसुन की समस्याओं से संबंधित तकनीकी साहित्य एवं उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसान आगामी सीजन में बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन कर सकें।

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