राघव जैन नदी, वृक्ष और पक्षियों के संरक्षण का उठा रहे बीड़ा शिवना नदी अभियान में सहभागिता कर वृक्षारोपण किया
मंदसौर के मूल निवासी एवं वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययनरत राघव जैन अपने गृह नगर प्रवास के दौरान पर्यावरण संरक्षण की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने विधायक श्री विपिन जैन द्वारा चलाए जा रहे शिवना नदी शुद्धिकरण एवं वृक्षारोपण अभियान में शामिल होकर पौधारोपण किया
प्रकृति प्रेमी एवं पर्वतारोही राघव जैन का मानना है कि जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। वे जब भी मंदसौर आते हैं, शिवना नदी शुद्धिकरण अभियान में अपनी सहभागिता अवश्य निभाते हैं। उनका उद्देश्य केवल स्वयं पर्यावरण संरक्षण करना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करना भी है।
राघव जैन इससे पूर्व “पर्यावरण बचाओ, वृक्ष लगाओ” अभियान के तहत साइकिल यात्रा निकालकर लोगों को जागरूक कर चुके हैं। उन्होंने स्वयं अनेक पौधे लगाए हैं और उनके बड़े होने तक उनकी नियमित देखभाल भी की है। इसके अलावा वे सीड बॉल (बीज गेंद) बनाकर जंगलों एवं बंजर क्षेत्रों में फेंकते हैं, ताकि प्राकृतिक रूप से अधिक से अधिक पौधे विकसित हो सकें और हरियाली बढ़े।
पर्यावरण के साथ-साथ राघव जैन पक्षी संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्हें जब भी कोई घायल पक्षी दिखाई देता है, वे उसे अपने घर लाकर उसका उपचार करते हैं। स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ देते हैं, ताकि वह फिर से खुले आसमान में उड़ान भर सके। उनको एक दूरलभ प्रजाति का पक्षी मिला था उसको वन विभाग के हवाले भी किया था उनका मानना है कि यदि पेड़ रहेंगे तो पक्षियों को घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थान मिलेगा, भोजन मिलेगा और हमारे घरों के आसपास पक्षियों का मधुर कलरव हमेशा सुनाई देता रहेगा। इसलिए वृक्षारोपण केवल हरियाली बढ़ाने का नहीं, बल्कि पक्षियों और पूरे पर्यावरण के संरक्षण का भी प्रभावी माध्यम है।
राघव जैन का कहना है, “पेड़ हमें शुद्ध हवा देते हैं और स्वच्छ नदियां शुद्ध पानी। हवा और पानी जीवन के सबसे आवश्यक तत्व हैं। यदि हम आज प्रकृति की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य दे सकेंगे।”
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए, उसकी देखभाल करे, नदियों और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने में सहयोग दे तथा घायल पक्षियों और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति भी संवेदनशील बने। उनका मानना है कि प्रकृति के प्रति हमारा छोटा-सा प्रयास भी समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है।

