आयुष्मान योजना बनी जीवनदायिनी: ऋषि पोरवाल के लिए आयुष्मान कार्ड बना रक्षा कवच
मंदसौर अनुयोग हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड की मदद से इलाज करवा रहे ऋषि पोरवाल पिता प्रकाश पोरवाल की दास्तान कुछ इस प्रकार हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा निवासी 31 वर्षीय श्री ऋषि पोरवाल का जीवन अचानक एक बड़े संकट से गुजरने लगा। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले ऋषि अपने परिवार के सहारे और मेहनत के बल पर जीवन जी रहे थे। लेकिन 29 जनवरी से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी, जिसने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया।
धीरे-धीरे स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें पैरालिसिस (लकवा) का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही गले में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई, जिससे सांस लेने और बोलने में भी कठिनाई होने लगी। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण परिवार के लिए इतना बड़ा इलाज कराना लगभग असंभव था। हर दिन बढ़ती बीमारी और घटती उम्मीदें परिवार को तोड़ने लगीं।
ऐसे कठिन समय में उन्हें मंदसौर के अनुयोग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर मानते हुए तुरंत इलाज शुरू किया। गले की समस्या के कारण उनका ऑपरेशन किया गया और उन्हें लंबे समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। यह समय न सिर्फ मरीज बल्कि पूरे परिवार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।
इसी दौरान एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आया आयुष्मान कार्ड। इस योजना के तहत ऋषि को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिला। जहां एक ओर परिवार आर्थिक बोझ के तले दबा हुआ था, वहीं इस योजना ने उन्हें राहत दी और बिना किसी चिंता के इलाज जारी रखने का रास्ता खोल दिया।
डॉक्टरों की मेहनत, सही समय पर मिला इलाज और मरीज की मजबूत इच्छाशक्ति ने धीरे-धीरे चमत्कार करना शुरू किया। जो मरीज कभी जीवन के लिए संघर्ष कर रहा था, वह अब लगभग 70 प्रतिशत स्वस्थ हो चुका है। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि वे अब वेंटिलेटर सपोर्ट से बाहर आ चुके हैं और खुद से सांस ले पा रहे हैं।
आज ऋषि पोरवाल की कहानी सिर्फ एक मरीज के ठीक होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, उम्मीद और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग की एक जीवंत मिसाल है। यह दर्शाती है कि यदि समय पर सही सहायता मिल जाए, तो सबसे कठिन परिस्थितियों से भी बाहर निकला जा सकता है।
साथ ही यह कहानी यह भी बताती है कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं वास्तव में जरूरतमंदों के जीवन में बदलाव ला रही हैं।

