अठाना। इस वर्ष क्षेत्र में मानसून की आधी-अधूरी बरसात ने किसानों व्यापारियों श्रमिकों आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती दौर में किसानों को अच्छी बारिश की उम्मीद थी, लेकिन वर्षाकाल समाप्ति की ओर बढ़ने के बावजूद क्षेत्र के प्रमुख जलस्रोत पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। इसके चलते आगामी रबी सीजन में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा या नहीं, इसको लेकर किसानों में अभी से चिंता दिखाई देने लगी है।
क्षेत्र के प्रमुख केनपुरिया जलाशय में इस वर्ष लगभग आधा ही पानी संग्रहित हो पाया है। जलाशय पूरी क्षमता तक नहीं भरने के कारण जहां नहरों से सिंचाई की उम्मीद कमजोर दिखाई दे रही है, वहीं जलाशय का जलस्तर कम रहने से आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि इसी जलाशय परिसर में स्थित ट्यूबवेल के माध्यम से करीब सात किलोमीटर दूर से अठाना नगर में दो दिन के अन्तराल में पेयजलापूर्ति। होती है लेकिन
केनपुरिया जलाशय में पर्याप्त जलभराव नहीं होने से इस बार नहर के माध्यम से मिलने वाली सिंचाई का लाभ भी किसानों को पर्याप्त रूप से मिल पाएगा या नहीं, इस पर प्रश्नचिह्न लग गया है। रबी फसल के समय खेतों को पानी की जरूरत बढ़ जाती है। यदि जलाशय में उपलब्ध पानी सीमित रहा तो नहरों से सिंचाई का क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है।
इसी प्रकार सरोदा नला क्षेत्र में स्थित नसन्नी जलाशय भी इस वर्ष पूरी तरह नहीं भर पाया है। यहां भी जलभराव कम रहने से नहरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई का पानी मिलने की संभावना कमजोर नजर आ रही है। क्षेत्र के नदी-नालों में भी इस वर्ष पर्याप्त पानी नहीं है। वर्तमान में अधिकांश नदी-नालों में नाममात्र का पानी दिखाई दे रहा है, जिससे आगामी दिनों में भूजल स्तर को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है।
इधर क्षेत्र में किसानों द्वारा रबी सीजन की प्रमुख फसलों में उटीलहसुन की खेती की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है। किसान बड़ी मात्रा में लहसुन का बीज खरीदकर खेतों में लगाने का कार्य कर रहे हैं। लहसुन की फसल को समय-समय पर पर्याप्त सिंचाई की आवश्यकता होती है। ऐसे में जलस्रोतों में कम पानी और कमजोर भूजल स्तर किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है।
कई किसानों ने आगामी रबी सीजन में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने की उम्मीद में लहसुन का महंगा बीज खरीदा है। इसके साथ ही खेत तैयार करने, खाद-बीज, दवाइयां मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर भी हजारों से लाखों रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। कुछ किसान सिंचाई की व्यवस्था मजबूत करने के लिए ट्यूबवेल खनन पर भी बड़ी राशि खर्च करने की तैयारी में हैं। लेकिन यदि भूजल स्तर भी नीचे रहा तो नए ट्यूबवेल से पर्याप्त पानी मिलना भी आसान नहीं होगा।
अल्प वर्षा के चलते भूजल स्तर में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने पर आने वाले समय में प्रशासन द्वारा नए ट्यूबवेल खनन को लेकर कोई प्रतिबंध या नियंत्रण लगाया जाता है तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में किसान असमंजस की स्थिति में हैं कि रबी फसल के लिए पानी की व्यवस्था कैसे की जाएगी।
एक ओर किसान महंगे दामों पर लहसुन का बीज खरीदकर खेतों में लगाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। किसानों के सामने स्थिति कुछ ऐसी बनती जा रही है कि इधर खेती में निवेश करें तो पानी की चिंता और उधर पानी की व्यवस्था करें तो भूजल उपलब्धता की चिंता। सरोदा नला क्षेत्र से रामचंद्र धाकड़ ने बताया है कि नसन्नी जलाश्य पुरा नही भरा है।
किसानों नंदकिशोर पटेल हनुमंतिया राजेश बंबोरिया धाकड़ तुंबा का कहना है कि खेती पहले ही लागत बढ़ने के कारण चुनौतीपूर्ण हो गई है। बीज, खाद, दवाइयां, मजदूरी और खेत तैयार करने में लगातार खर्च बढ़ रहा है। ऐसे समय में यदि रबी सीजन में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला तो किसानों की पूरी मेहनत और पूंजी संकट में पड़ सकती है।
कुल मिलाकर इस वर्ष की कमजोर एवं असमान बरसात का असर अब खरीफ के बाद रबी सीजन की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने की आशंका दिखाई दे रही है। केनपुरिया जलाशयों में कम जलभराव, नदी-नालों में नाममात्र का पानी और संभावित कमजोर भूजल स्तर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो क्षेत्र में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता हैं शांतिलाल चौहान द्वारा
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