सकल जैन समाज वीर पुत्र जयम द्वारा मासिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया
दया करुणा तथा अहिंसा की प्रतीक पिच्छी पर वक्ताओं ने रखे अपने विचार
मंदसौर। सकल जैन समाज के तत्वावधान में सकल जैन समाज वीर पुत्र जयम द्वारा संस्कृति की समुज्जवलन तथा वैचारिक उन्नयन हेतु मासिक बौद्धिक संस्कार संगोष्ठी प्रतिमाह के द्वितिय रविवार को करने का निर्णय किया गया था। जिसके अंतर्गत प्रथम संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 12 जुलाई 2026, रविवार को प्रात: 9.30 बजे 1008 श्री शान्तिनाथ जिनालय (तार बंगला) दिवाकर द्वार, बीपीएल चौराहा, मन्दसौर पर किया गया। जिसका विषय दया करुणा तथा अहिंसा की प्रतीक पिच्छी
रखा गया जिस पर उपस्थित वक्ताओं ने अपने विचार रखें।
इस अवसर पर सकल जैन समाज के संयोजक सुरेन्द्र लोढा, सकल जैन समाज अध्यक्ष लोकेन्द्र जैन गोटावाला, वीर पुत्र जयम के राजमल गर्ग, प्रमुख वक्ता के रूप में राजकुमार बाकलीवाल एवं शांतिलाल बड़जात्या मंचासिन थे।
सर्वप्रथत उपस्थित सभी अतिथियों एवं वक्ताआेंं ने भगवान महावीर के चित्र पर दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। सकल जैन समाज वीर पुत्र जयम के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों एवं वक्ताओं का सम्मान एवं स्वागत किया गया।
इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन देते हुए सकल जैन समाज वीर पुत्र जयम के संवाहक राजमल गर्ग ने बताया कि आज के समय में इस प्रकार के संगोष्ठीयों की बेहद आवश्यकता है ताकि युवा पीढी को हम हमारी संस्कृति, परंपरा और संस्कारों से जोड सकें।
सकल जैन समाज के संयोजक सुरेन्द्र लोढा बताया कि एक धर्मसभा में सांसद मेनका गांधी द्वारा दिगम्बर संत से कहा कि आपकी पिच्छी के कारण 15 लाख मोरों की हत्या होती है लेकिन यह बात पूरी तहर से तथ्यहीन थी इस प्रकार की बात का कही कोई प्रमाण नहीं है दिगम्बर जैन संत तो त्याग की पराकाष्ठा करते है और उनकी पिच्छी पर इस प्रकार की अशोभनीय टिप्पणी से जैन समाज में रोष व्यापत है।
सकल जैन समाज के अध्यक्ष लोकेन्द्र जैन गोटावाला ने कहा कि मासिक संगोष्ठी का आयोजन स्वागत योग्य है हम सभी में दया, करूणा का भाव होना चाहिए। सामने वाला क्या करता है हमारे लिए क्या सोचता है इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए हमें सदैव हमारा कर्म करते रहना चाहिए।
मुख्य वक्ता राजकुमार बाकलीवाल ने दिगम्बर संतों के उपयोग में आने वाली पवित्र पिच्छी के बारे में बताया कि यह पिच्छी मोर के पंखों से इसलिए बनाई जाती है क्योंकि मोर ही एक ऐसा एक मात्र प्राणी है जो वासना रहित होता है और मोर पंखों को अत्यंत पवित्र माना गया है लेकिन पिच्छी के निर्माण के लिए किसी मोर की हत्या नहीं कि जाती है यह स्वत: टूटे हुए पंखों से बनाई जाती है।
मुख्य वक्ता शांतिलाल बड़जात्या ने बताया कि मोर वर्ष में एक बार अपने सभी पंखों को त्यागता है और प्राकृतिक रूप से पुन: नये पंख आते है मोर कोई पालतू पक्षी भी नहीं है यह तो जंगलों में स्वतंत्र रूप से घूमने वाला पक्षी है इसके साथ ही यह हमारा राष्ट्रीय पक्षी भी है और मोर पंखों के अनेक गुणों के कारण इसका उपयोग दिगम्बर साधु संतों की पिच्छी के रूप में किया जाता है।
कार्यक्रम का संचालन सकल जैन समाज वीर पुत्र जयम के अक्षय मारू ने किया एवं अंत में आभार उमेश जैन भड़का ने माना। कार्यक्रम पश्चात स्वल्पाहार का आयोजन लाभार्थी परिवार राजकुमारजी अजय कुमारजी बाकलीवाल परिवार द्वारा किया गया।
इस अवसर पर श्री सुरेन्द्र लोढा, श्री लोकेन्द्र जैन गोटावाला, श्री अशोक मारू, श्री शान्तिलाल बडजात्या, डॉ राजकुमार बाकलीवाल, राजमल गर्ग, श्री नन्दकिशोर अग्रवाल, डाँ ज्ञानचंद खिमेसरा, श्री विनेन्द्र जैन, श्री दीपक भुता, श्री पं. अरविन्द जैन, श्री अनिल जैन (बैंक) श्री गुणवान सिंह कोठारी, मनीष सेठी, श्री जवाहरलाल जैन, वीरेन्द्र जैन, नरेन्द्र मेहता, अजीत नाहर, सुरज कुमार बाकलीवाल, पवन अजमेरा, मानमल जैन, जितेन्द्र डोसी, गोपी अग्रवाल, राकेश डोसी, सुधीर जैन, अभय अजमेरा, ओमजी अग्रवाल (सर), बी.आर. नलवाया, सुरजमल जैन, हंसमुख रंगीला, विजेन्द्र फाफरिया, प्रतिक चंडालिया, अक्षय मारू, जयेश डाँगी, पंकज अग्रवाल,उमेश जैन (भड़का), अभिलाभ बाकलीवाल, असीत बाकलीवाल, अर्पित बाकलीवाल, प्रिन्स बाकलीवाल आदि उपस्थित थे।

सकल जैन समाज वीर पुत्र जयम द्वारा मासिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया
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