मिटती विरासत को मिला जीवन: जल गंगा संवर्धन अभियान से निखरी प्राचीन बावड़ी
मंदसौर – मंदसौर जिले के भैसोदामंडी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन बावड़ी, जो कभी स्थानीय लोगों के जीवन का प्रमुख जल स्रोत हुआ करती थी, आज फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल कर चुकी है। यह परिवर्तन संभव हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए गए जीर्णोद्धार कार्यों से, जिसने एक उपेक्षित धरोहर को नई जिंदगी दे दी।
वर्षों से देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक बावड़ी पूरी तरह घास-फूस, झाड़ियों और गंदगी से ढक चुकी थी। पानी दूषित हो चुका था और इसका उपयोग लगभग समाप्त हो गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बावड़ी ग्वालियर रियासत काल की एक महत्वपूर्ण जल संरचना थी, जो कभी आसपास के क्षेत्र की प्यास बुझाती थी और सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करती थी।
लेकिन जब जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत हुई, तो इस बावड़ी के कायाकल्प का कार्य भी प्राथमिकता में लिया गया। साफ-सफाई, कचरा हटाने, जल स्रोत को पुनर्जीवित करने और आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए गए। इसके परिणामस्वरूप आज यह बावड़ी एक बार फिर स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक रूप में सामने आई है।
अब यह केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं रही, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी बन गई है। स्थानीय नागरिकों में भी इस पहल को लेकर जागरूकता बढ़ी है और वे इसके संरक्षण के लिए आगे आ रहे हैं।
भैसोदामंडी की यह सफलता कहानी बताती है कि यदि सामूहिक प्रयास और सही दिशा में काम किया जाए, तो पुरानी धरोहरों को फिर से जीवंत किया जा सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान न केवल जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का भी सशक्त माध्यम बन रहा।

