प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ा आस्था का मार्ग: चीताखेड़ा में आक्रोश, कभी भी फूट सकता है ग्रामीणों का गुस्सा

प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ा आस्था का मार्ग: चीताखेड़ा में आक्रोश, कभी भी फूट सकता है ग्रामीणों का गुस्सा

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प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ा आस्था का मार्ग: चीताखेड़ा में आक्रोश, कभी भी फूट सकता है ग्रामीणों का गुस्सा

चीताखेड़ा। नीमच जिले के चीताखेड़ा से राजस्थान सीमा तक बनने वाली सड़क अब लोक निर्माण विभाग और लापरवाह ठेकेदार की जुगलबंदी के कारण जन-आक्रोश का केंद्र बन गई है। आगामी 19 मार्च से शुरू होने वाले प्रसिद्ध आवरीमाता मेले को लेकर ग्रामीणों और मंदिर ट्रस्ट एवं मेला समिति में भारी चिंता है, लेकिन जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।

कलेक्टर के आदेश को ठेकेदार ने दिखाया ठेंगा

विगत 5 मार्च को मंदिर समिति द्वारा जिला कलेक्टर डॉ. हिमांशु चंद्रा को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया गया था। कलेक्टर और एसडीएम संजीव साहू के कड़े रुख के बाद पीडब्ल्यूडी की एसडीओ नेहा राठौर ने फोन पर ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 15 मार्च तक सड़क हर हाल में ‘चलायमान’ होनी चाहिए।
14 मार्च शनिवार तक कि जमीनी हकीकत “ज्यों की त्यों” बनी हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि ठेकेदार को न तो प्रशासन का भय है और न ही जनता की आस्था की परवाह।

खुदी पड़ी सड़क, बिखरी गिट्टियां: श्रद्धालुओं के लिए बना ‘डेथ ट्रैप’

वर्तमान में सड़क पूरी तरह खुदी हुई है और चारों तरफ पत्थर की नुकीली गिट्टियां बिखरी पड़ी हैं। मेले में आने वाले हजारों पदयात्री और श्रद्धालु इस मार्ग से नहीं गुजर पाएंगे। धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ हो रहा है। हर साल चैत्र नवरात्रि पर यहाँ 30 से 40 हजार श्रद्धालु आते हैं। यदि समय रहते सड़क नहीं बनी, तो लाखों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। निर्माण कार्य की कछुआ चाल को देखकर साफ है कि ठेकेदार की नियत काम पूरा करने की नहीं है।

चक्काजाम और आंदोलन की चेतावनी

प्रशासन की इस निष्क्रियता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग ने केवल कागजी घोड़े दौड़ाने के बजाय जमीन पर काम नहीं दिखाया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को मजबूर होंगे। सवाल यह उठता है कि क्या पीडब्ल्यूडी विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर ठेकेदार की मनमानी के आगे जिला प्रशासन नतमस्तक है?

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इनका कहना

” ठेकेदार द्वारा आवरी माताजी के प्रति हजारों श्रद्धालुओं के मन में अगाध श्रद्धा और आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्तमान तक सड़क निर्माण कार्य में सुगमता की कहीं से कहीं तक उम्मीद की किरण दिखाई नहीं दे रहीं हैं।अगर मेले से पहले सड़क सुगम नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार और शासन-प्रशासन की होगी।”
दशरथ माली, आवरी माताजी मंदिर ट्रस्ट सदस्य चीताखेड़ा।

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