मंदसौर के मल्हारगढ़ क्षेत्र में ओलावृष्टि ने अफीम-गेहूं समेत फसलें बर्बाद, जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर बोले- सरकार दे तुरंत मुआवजा
प्रकृति का कहर: मनासाखुर्द से जार्डा तक फसलें नष्ट, कांग्रेस अध्यक्ष गुर्जर ने की 2 लाख प्रति एकड़ मुआवजे की मांग
अफीम उत्पादकों पर सबसे भारी मार!
मल्हारगढ़ में ओले-बारिश से फसलें चौपट, श्री गुर्जर ने नारकोटिक्स विभाग से विशेष राहत की अपील
मन्दसौर। जिले के ब्लॉक मल्हारगढ़ में मनासाखुर्द, गोपाल पूरा, जार्डा, हरमाला आदि गांवो में किसानों पर प्रकृति का यह कहर अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने अफीम, गेहूं, सरसों, धनिया, अलसी, चिया सीड, मेथी, मसूर, चना सहित सभी प्रमुख फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। यह फसलें किसानों की वर्ष भर की मेहनत, निवेश और परिवार की आजीविका का आधार होती हैं, और इनके एकाएक बर्बाद हो जाने से हजारों परिवार संकट में पड़ गए हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित सभी किसान भाइयों के साथ पूर्ण एकजुटता और संवेदना व्यक्त करता हूं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब फसलें कटाई के लिए तैयार थीं, तब प्रकृति ने ऐसी मार मारी। विशेष रूप से अफीम की खेती, जो इस क्षेत्र की प्रमुख और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसल है, उसके नुकसान से किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री गुर्जर ने जिला कलेक्टर एवं से मांग करते हुए कहा कि
मध्य प्रदेश सरकार तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कराए, जिसमें राजस्व, कृषि और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त टीम शामिल हो।
किसानों को उचित और त्वरित मुआवजा प्रदान किया जाए। नुकसान की गंभीरता को देखते हुए मुआवजा राशि न्यूनतम 1.5 से 2 लाख रुपये प्रति एकड़ या फसल के मूल्यांकन के अनुसार होनी चाहिए, ताकि किसान अगली बुआई के लिए सक्षम हो सकें।
नारकोटिक्स विभाग अफीम उत्पादकों को विशेष राहत प्रदान करे, जिसमें लाइसेंस शुल्क में छूट, उत्पादन लक्ष्य में समायोजन और मुआवजे की अतिरिक्त राशि शामिल हो, क्योंकि अफीम की खेती नियंत्रित और सरकारी नीति के तहत होती है।
प्रभावित किसानों के कर्ज पर ब्याज माफी और फसल बीमा क्लेम की त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस पार्टी हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और रहेगी। मैंने पार्टी स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यदि सरकार संवेदनशीलता नहीं दिखाती, तो हम किसानों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण आंदोलन और कानूनी रास्ते अपनाने को बाध्य होंगे।
किसान भाइयों, हिम्मत न हारें। आपकी आवाज सुनी जाएगी। हम सब मिलकर इस संकट से उबरेंगे।

