कवि गीतकार गोपालदास नीरज की 100वीं जयन्ति शनिवार को संगीत प्रेमियों ने मनाई

कवि गीतकार गोपालदास नीरज की 100वीं जयन्ति शनिवार को संगीत प्रेमियों ने मनाई

राजस्थान

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कवि गीतकार गोपालदास नीरज की 100वीं जयन्ति शनिवार को संगीत प्रेमियों ने मनाई

कालजयी रचनाकार वहीं कहलाते हैं, जिनके शब्दों की चेतना काल के साथ गुंथी होती है : शत्रुघ्न

प्रतापगढ़। कालजयी रचनाकार वहीं कहलाते हैं, जिनके शब्दों की चेतना काल के साथ गुंथी होती है, वह चेतना समय के साथ और समय के बाद भी साथ-साथ चलती है, उक्त बात शनिवार को सौवीं जयंती के मौके पर यहां पेंशनर समाज के बैनरतले पेंशनर भवन में आयोजित ‘’कांरवा गुजर गया-नीरज गीत गंगा’’ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सहायक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी शत्रुघ्न शर्मा ने कही।
उन्होने कवि गीतकार की एक सौ वीं जयंति पर उन्हे श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि हिंदी के प्रसिद्ध कवि और गीतकार गोपालदास नीरज को जब हम याद करते हैं तो हमारे समय की धड़कन जैसे हमें सचेत करती है कि सालों पहले उन्होंने जो सब लिख दिया, वह आज के माहौल से जुदा नहीं है।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पेंशनर समाज के जिलाध्यक्ष मगनीराम सुथार ने कहा कि पेंशनर समाज का सौभाग्य है कि देश के ख्यातनाम कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज के लिखे हुए गीतों को स्थानीय कलाकारों के माध्यम से उनके 100वें जन्मदिन को यादगार बनाया, इस का श्रेय कार्यक्रम के संयोजक जगदीशचन्द्र शर्मा और उनकी पूरी टीम को जाता है।
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि पेंशनर समाज के महामंत्री दुर्गाप्रसाद सौलंकी ने गोपालदास नीरज को याद करते हुए कहा कि कवि सम्मेलनों में निराला, बच्चन, दिनकर, माखनलाल चतुर्वेदी, शिवमंगलसिंह सुमन और गोपालसिंह नेपाली जैसे दिग्गज हिंदी कवियों की तरह उनकी शख्सियत और शब्दावली का भी अपना-सा प्रभाव था। बड़ा हर्ष का विषय है कि पेंशनर समाज को 100वीं जयंति मनाने का अवसर मिला, ‘’कांरवा गुजर गया-नीरज गीत गंगा’’ कार्यक्रम में न सिर्फ गीत-संगीत शामिल है अपितु नीरज की रचनाओं की प्रस्तुति भी स्थानीय कवियों ने दी। नीरज के लिखे गीतों पर स्थानीय गायक कलाकारों ने गाने प्रस्तुत किए तो स्थानीय कवियों ने उनकी रचना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को रौचक बना दिया।
कार्यक्रम के सूत्रधार एवं संचालन जगदीश शर्मा ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि अपनी रचनाओं में जिंदगी का फलसफा पिरोने वाले और गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले प्रख्यात गीतकार कवि गोपालदास नीरज का लाखों में एक कद्रदान मैं भी रहा हूं। प्रतापगढ़ का सौभाग्य रहा है कि कालजयी गीतों के रचयिता कवि गोपालदास नीरज 04 बार प्रतापगढ़ में अपनी प्रस्तुति दे चुके है।
शर्मा ने कहा कि ऐसे महाकवि की 100वीं जयंति मनाने का सौभाग्य हमें मिला है, जिन्होने अपने जमाने में मात्र 2 हजार में कविता पाठ करके श्राताओें के दिलों में अपनी अमिट जगह बना ली। उन्होने कहा कि आजे के 20 लाख से बात नहीं करते है, जबकि कवि गोपालदास की रचनाओं का मुकाबला आज के कवि की रचनाऐं नहीं कर सकती है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मां सरस्वती के चित्र पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण व द्वीप प्रज्जवलन किया गया, तत्पश्चात अतिथियों एवं स्थानीय कलाकारों का स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती के गीत से स्थानीय कलाकार कांठल केसरी रमाकांत अलबेला व मॉडल विद्यालय नागदेड़ा की छात्रा सुश्री भारती पटेल द्वारा प्रस्तुत गीत से हुई।
इन स्थानीय गायक कलाकारों व कवियों ने दी प्रस्तुति :
इस अवसर पर गीतकार नीरज के लिखे ‘‘मेघा छाए आधी रात बैरन बन गई’’ गीत को सरगम विज़न सोसायटी के उपाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने प्रस्तुत किया, कोषाध्यक्ष जगदीशचन्द्र शर्मा ‘‘ए भाई जरा देख के चलो’’, अनिल बण्डी ने ‘‘खिलते है गुल यहां’’, प्रदीप शर्मा ’दिल आज शायर है’’, डॉ. संजय गिल ’’ ओ मरी शर्मिली’’ गोपाल कुमावत ‘‘काल का पहिया घूमे रे भईया’’, रमाकांत अलबेला ‘‘शौखियों में घोला जाए फूलों का शबाब’’, खुमानसिंह ‘‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’’, शत्रुघ्न शर्मा ‘‘मेरा मन तेरा प्यासा’’, कृष्ण कुमार शर्मा ‘‘कारवां गुजर गया’’, दैनिक नवज्योति ब्यूरो चीफ राकेश सोनी ने ‘‘फूलों के रंग से दिल की कलम से’’, हीरालाल मीणा ‘‘ओ मेरी शर्मीली’’ तथा सुश्री भारती पटेल, अम्बालाल सुथार, ओमप्रकाश शर्मा एवं मुकेश ने भी प्रस्तुति दी, गानों के मध्य में प्रतापगढ़ साहित्य परिषद के अध्यक्ष एवं कवि सुरेश ‘‘सूरज’’, शिक्षक एवं औजस्वी कवि सुरेन्द्र ‘‘सुमन’’ योग भवन के संचालक एवं अधिवक्ता तरूणदास बैरागी सहित कई अन्य कवियों ने कविता पाठ के जरिए स्व. गोपालदास नीरज को शब्द सुमन प्रस्तुत किए।कवि गीतकार गोपालदास नीरज की 100वीं जयन्ति शनिवार को संगीत प्रेमियों ने मनाई
कालजयी रचनाकार वहीं कहलाते हैं, जिनके शब्दों की चेतना काल के साथ गुंथी होती है : शत्रुघ्न
प्रतापगढ़।
कालजयी रचनाकार वहीं कहलाते हैं, जिनके शब्दों की चेतना काल के साथ गुंथी होती है, वह चेतना समय के साथ और समय के बाद भी साथ-साथ चलती है, उक्त बात शनिवार को सौवीं जयंती के मौके पर यहां पेंशनर समाज के बैनरतले पेंशनर भवन में आयोजित ‘’कांरवा गुजर गया-नीरज गीत गंगा’’ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सहायक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी शत्रुघ्न शर्मा ने कही।
उन्होने कवि गीतकार की एक सौ वीं जयंति पर उन्हे श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि हिंदी के प्रसिद्ध कवि और गीतकार गोपालदास नीरज को जब हम याद करते हैं तो हमारे समय की धड़कन जैसे हमें सचेत करती है कि सालों पहले उन्होंने जो सब लिख दिया, वह आज के माहौल से जुदा नहीं है।
इन स्थानीय गायक कलाकारों व कवियों ने दी प्रस्तुति :
इस अवसर पर गीतकार नीरज के लिखे ‘‘मेघा छाए आधी रात बैरन बन गई’’ गीत को सरगम विज़न सोसायटी के उपाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने प्रस्तुत किया, कोषाध्यक्ष जगदीशचन्द्र शर्मा ‘‘ए भाई जरा देख के चलो’’, अनिल बण्डी ने ‘‘खिलते है गुल यहां’’, प्रदीप शर्मा ’दिल आज शायर है’’, डॉ. संजय गिल ’’ ओ मरी शर्मिली’’ गोपाल कुमावत ‘‘काल का पहिया घूमे रे भईया’’, रमाकांत अलबेला ‘‘शौखियों में घोला जाए फूलों का शबाब’’, खुमानसिंह ‘‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’’, शत्रुघ्न शर्मा ‘‘मेरा मन तेरा प्यासा’’, कृष्ण कुमार शर्मा ‘‘कारवां गुजर गया’’, दैनिक नवज्योति ब्यूरो चीफ राकेश सोनी ने ‘‘फूलों के रंग से दिल की कलम से’’, हीरालाल मीणा ‘‘ओ मेरी शर्मीली’’ तथा सुश्री भारती पटेल, अम्बालाल सुथार, ओमप्रकाश शर्मा एवं मुकेश ने भी प्रस्तुति दी, गानों के मध्य में प्रतापगढ़ साहित्य परिषद के अध्यक्ष एवं कवि सुरेश ‘‘सूरज’’, शिक्षक एवं औजस्वी कवि सुरेन्द्र ‘‘सुमन’’ योग भवन के संचालक एवं अधिवक्ता तरूणदास बैरागी सहित कई अन्य कवियों ने कविता पाठ के जरिए स्व. गोपालदास नीरज को शब्द सुमन प्रस्तुत किए।

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ब्यूरो चिफ अनिल जटिया

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