ग्राम झांतला में महावीर भगवान जन्म जयंती बड़े हर्षो,उल्लास के साथ मनाई गयी।

ग्राम झांतला में महावीर भगवान जन्म जयंती बड़े हर्षो,उल्लास के साथ मनाई गयी।

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ग्राम झांतला में महावीर भगवान जन्म जयंती बड़े हर्षो,उल्लास के साथ मनाई गयी।

त्रिशला,नंदन वीर की जय बोलो महावीर की जैसे गगन भेदी नारों से माहौल भक्ति मय हो गया।

झांतला। श्री भेरुनाथ की नगरी व विशुद्ध नगर झांतला में भगवान महावीर जयंती पर महावीर स्वामी का 2625 वां जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास ,उमंग के साथ मनाया गया।
ग्राम के दिगंबर जैन मंदिर पर जैन धर्मावलंबीयों द्वारा प्रातः प्रभात फेरी के बाद भगवान महावीर की पूजा आरती व अभिषेक किया गया।
दोपहर एक विशाल जुलुस के साथ भगवान की प्रतिभा को चांदी के बेवाण में बिठाकर बैंड बाजों के साथ जुलूस निकाला गया जो ग्राम के जैन मंदिर से बालाजी मंदिर, भेरुनाथ मंदिर बस स्टैंड ,नई आबादी होते हुए पुनः मंदिर जी लाया गया जहां भगवान पर कलशाभिषेक हुए।
महावीर,जयंती जैन धर्म का प्रमुख त्यौहार है। भगवान महावीर 24,वें तीर्थंकर है। जिनका जन्म दिवस चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व अहिंसा शांति सद्भाव और त्याग का अमर संदेश के साथ अपरिग्रह ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों को याद करने और उसके प्रसार के लिए मनाया जाता है। भगवान महावीर का जन्म बिहार के कुंडलपुर में हुआ तथा उनका प्रारंभिक नाम वर्धमान सागर जी था। भगवान महावीर ने सर्वप्रथम दुनिया में जियो और जीने दो के अमर संदेश से अहिंसा और शांति का महामंत्र दिया है। यह केवल जन्म दिवस नहीं बल्कि आत्मा का संयम मार्ग पर चलकर परमात्मा बनने और करुणा का पर्व है। महावीर जयंती आध्यात्मिक महत्व का पर्व है।
जैन धर्मावलंबी जुलूस के आगे नाचते गाते त्रिशला,नंदन वीर की जय बोलो महावीर की एक,दो, तीन चार जैन धर्म की जय जयकार के जयकारों को गुंजायमान कर रहे थे।भगवान महावीर का अमर संदेश जियो और जीने दो से माहौल भक्ति मय हो गया ।जैन धर्मावलंबी पूरे नगर में जगह-जगह भगवान महावीर जन्मोत्सव कीअनुमोदना कर पूजा आरती की।

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