शहीदों के लिये शहीद नहीं अमर हुतात्मा और शाही के स्थान पर दिव्य-भव्य शब्दों का प्रयोग होना चाहिये- गुरूजी भीमाशंकरजी धारियाखेड़ी
शहीदों के लिये शहीद नहीं अमर हुतात्मा और शाही के स्थान पर दिव्य-भव्य शब्दों का प्रयोग होना चाहिये- गुरूजी भीमाशंकरजी धारियाखेड़ी मन्दसौर। कुमावत धर्मशाला नरसिंहपुरा में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा प्रसंग के संदर्भ में हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी को महत्व देने के उद्देश्य से आपने कहा हमें बोलचाल की भाषा […]
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