बच्चों की जान बचाने के लिए कंचन मेघवाल ने अदम्य साहस दिखाते हुवे दिया बलिदान, शासन दे वीरता पुरस्कार – बंशीलाल टांक
मंदसौर। नीमच जिले के जावद तहसील के ग्राम रानापुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और ‘जय माता दी स्व-सहायता समूह’ की अध्यक्ष कंचन मेघवाल ने अपने प्राणों की आहुति देकर मानवता की एक बेमिसाल इबारत लिखी है। आंगनवाड़ी के मासूम बच्चों को मधुमक्खियों के जानलेवा हमले से बचाने के लिए उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए खुद को न्योछावर कर दिया।
हजारों डंक सहे, पर बच्चों को आंच नहीं आने दी।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं योग गुरु बंशीलाल टांक ने बताया कि घटना के अनुसार, जब मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक आंगनवाड़ी पर हमला किया, तब वहां करीब 20 बच्चे मौजूद थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कंचन मेघवाल ने तुरंत अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने बच्चों को आनन-फानन में तिरपाल और दरी में लपेटा और सुरक्षित कमरे में बंद कर दिया। इस संघर्ष के दौरान हजारों मधुमक्खियों ने कंचन को बुरी तरह डंक मार दिया, जिसके कारण वह स्वयं को नहीं बचा सकीं और बच्चों की जान बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं।
टांक ने इस शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन से विशेष माँग की है की कंचन मेघवाल का यह कृत्य केवल कर्तव्य का पालन नहीं, बल्कि अदम्य साहस और शहादत है। उन्होंने अपनी जान देकर 20 घरों के चिरागों को बुझने से बचाया है। माननीय प्रधानमंत्री जी व माननीय मुख्यमंत्री जी से माँग है कि कंचन मेघवाल मरणोपरांत ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए और वीरता के लिए अर्जुन पुरस्कार अथवा समकक्ष राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा जाए।

