सत्य के मार्ग पर चलना ही मनुष्य धर्म है:- साध्वी प्रेम बाईसा

सत्य के मार्ग पर चलना ही मनुष्य धर्म है:- साध्वी प्रेम बाईसा

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सत्य के मार्ग पर चलना ही मनुष्य धर्म है:- साध्वी प्रेम बाईसा

मोरवन:- ग्राम मोरवन के राजनगर में चल रहे बाबा रामदेव मंदिर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से साध्वी प्रेम बाईसा ने कहा की सत्य ही कृष्ण है सत्य ही राम है सत्य ही धर्म है धर्म ही सत्य है सत्य के मार्ग पर चलना ही मनुष्य का धर्म है। भागवत में सत्य की स्तुति की गई है।आगे साध्वी जी ने शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप और अमर कथा का वर्णन किया साथ ही श्री सुखदेव जी का जन्म कथा साध्वी प्रेम बाईसा ने बताया कि भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। राजा परीक्षित के कारण भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।इसके साथ साथ भागवत के छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, 24 अवतार श्री नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म, कुन्ती देवी के सुख के अवसर में भी विपत्ति की याचना करती है। जीवन की अन्तिम बेला में दादा भीष्म गोपाल का दर्शन करते हुये अद्भुत देह त्याग का वर्णन किया। रीक्षित को श्राप कैसे लगा तथा भगवान श्री शुकदेव उन्हे मुक्ति प्रदान करने के लिये कैसे प्रगट हुये इत्यादि कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया भगवान शिव सहित अनेक संजीव जाकिया सजाई गई साथी श्रद्धा श्रद्धालुओं ने मीठे मीठे भजनों पर खूब नृत्य किया।

मंच पर विराजजीत महंत श्री 1008 विरमनाथ जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल पुस्तक नही साक्षात श्रीकृष्ण स्वरुप है। इसके एक एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाये हुये है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान श्री राम बैकुंठ लोग जा रहे थे तब उन्होंने एक धर्म सभा रखी जिसमें सभी लोगों को आमंत्रित किया और बताया कि मैं बैकुंठ लोग जा रहा हूं मेरे साथ जो भी वैकुंठ लोक आना चाहते हैं उन सभी का स्वागत है उपस्थित सभी प्रसन्न हुए लेकिन हनुमान जी महाराज दुखी हुए उन्होंने भगवान से कहा वेकुंत लोक में सत्संग कीर्तन होगा तो भगवान ने कहा वहा ये सब संभव नही भजन कीर्तन तो मत्युलोक में ही है तो हनुमान जी ने प्रथ्वी लोक में ही रहने का वर मांगा और राम जी से वचन लिया की जब भी भागवत कथा का आयोजन होगा उसमे अंतिम दिन आप भी किसी भी रूप में वेकुंट लोक छोड़ कर प्रथ्वी पर पछारोगे राम जी ने उनते तथास्तु किया।ये भागवत पुराण की महिमा है।

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दूसरे दिन के मुख्य जजमानों ने सपरिवार पूजन किया । पूजन का सभी कार्य मोरवन के पुरोहित आचार्य विक्रम जी शर्मा द्वारा विधिवत कराया गया। इस कथा का लाइव प्रसारण थोरेचा यूट्यूब चैनल एवं सोशल मीडिया पर भी किया जा रहा है।कथा स्थल में यजमानों सहित कई गणमान्य अतिथियों व आस पास के गांव से सैकड़ों लोगों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई।

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