रामस्नेही संप्रदाय के वयोवृद्ध संत श्री 108 चौकसराम मुनि जी का होगा नगर में चातुर्मास

रामस्नेही संप्रदाय के वयोवृद्ध संत श्री 108 चौकसराम मुनि जी का होगा नगर में चातुर्मास

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रामस्नेही संप्रदाय के वयोवृद्ध संत श्री 108 चौकसराम मुनि जी का होगा नगर में चातुर्मास

कल 16 तारिख मंगलवार को सायंकाल 5 बजे होगा नगर प्रवेश

सिंगोली:- मेवाड़ प्रान्त कि रानी पद्ममनि की धार्मिक नगरी सिंगोली में रामस्नेही संप्रदाय के श्री 108 संत शिरोमणि श्री चौकसराम मुनि जी का 2024 का मंगल चातुर्मास सिंगोली नगर में पुराना थाने के पास रामध्दारा में होने जा रहा है जिससे सनातन,संस्कार,संस्कृति के धर्म प्रेमी महिला,पुरुषों और युवाओं मे अपार उत्साह है मुनि श्री चौकसराम जी का मंगल प्रवेश 16 जुलाई मंगलवार को सायंकाल 5 बजे नगर मे मंगल प्रवेश कर रामध्दारा पहुचेंगे यहाँ धर्म प्रेमी नगर वासियों द्वारा उनका अभिनन्दन कर मुनि श्री रामद्वारे से कबूतर खाना ,अहिंसा पथ, शीतला माता,आजाद चौपाटी आदि
प्रमुख मार्गों से होते हुए रामध्दारा पहुंचेंगे जहा धर्मसभा होगी इस अवसर पर भक्तों द्वारा सभी धर्म प्रेमी नगरवासी समाजजनो से रामध्दारे में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील कि है |

रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्त्तक स्वामी रामचरण जी महाराज थे। उनका प्रादुर्भाव वि. स. 1776 में हुआ। साधारण जन को लोकभाषा में धर्म के मर्म की बात समझाकर, एक सूत्र में पिरोने में इस संप्रदाय से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इन संतों ने हिंदू-मुसलमान, जैन- वैष्णव, द्विज- शूद्र, सगुण-निर्गुण, भक्ति व योग के द्वन्द्व को समाप्त कर एक ऐसे समन्वित सरल मानवीय धर्म की प्रतिष्ठापना की जो सबके लिए सुकर एवं ग्राह्य था। आगे चलकर मानवीय मूल्यों से सम्पन्न इसी धर्म को “रामस्नेही संप्रदाय’ की संज्ञा से अभिहित किया गया।

रामद्वारा (देवनागरी रामद्वारा) का अर्थ है ” राम ” (अर्थात भगवान के नाम का द्वार )। यह रामस्नेही संप्रदाय में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए पूजा स्थल है, जो “राम” (राम) का जाप करने की वकालत करता है । रामस्नेही का अर्थ है “भगवान से प्रेम करने वाले लोग”। भगवान की पूजा करने का उनका तरीका सरल है। सभी धर्मों, जातियों, वर्गों आदि के लोग रामद्वारों में आते हैं।

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महेंद्र सिंह राठौड़

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