प्रायश्चित वो अग्नि है जिसमें बड़े से बड़े पाप जलकर भस्म हो जाते हैं - श्यामदास जी महाराज

प्रायश्चित वो अग्नि है जिसमें बड़े से बड़े पाप जलकर भस्म हो जाते हैं – श्यामदास जी महाराज

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प्रायश्चित वो अग्नि है जिसमें बड़े से बड़े पाप जलकर भस्म हो जाते हैं – श्यामदास जी महाराज,

रुपपुरा रंकावली माता में कथा में उमड़ रही है आस्था,

सरवानियां महाराज। अरावली पर्वतमाला रुपपुरा के पास शिखर पर स्थित मां रंकावली के दरबार में चतुर्थ दिवस की भागवत कथा के दौरान महाराज श्री श्यामदास जी धामनोद जिला धार वाले ने कहा कि आत्मा ही राम है । भरत जी आत्मा से प्रेम करते थे शरीर से नहीं। इसलिए एक प्रसंग वन गमन के दौरान उन्होंने खुद को बली चढ़ने के लिए सौंप दिया था लेकिन मां भगवती ने रक्षा की। आत्मा परमात्मा का शाश्वत रुप है। महाराज श्री ने कहा कि भरत जी के तीन जन्मों का वर्णन भागवत में आता है। प्रायश्चित वो अग्नि है जो बड़े से बड़े पापों को जलाकर भस्म कर देती है। हिंसा तीन प्रकार की होती है काईक वाचिक मानसिक ।बच्चों का नाम सोच-विचार कर रखने चाहिए।इस बीच कथा में भजन तेरी पार करेंगे नया भज कृष्ण कन्हैया ने खूब श्रावकों का मन मोहा। महाराज श्री ने कहा कि अंधकार का अस्तित्व तब तक है जब तक सूर्य उदय ना हो। भगवान का नाम भले ही छोटा है लेकिन काम बड़े बड़े कर देता है। कलयूग में नाम का बड़ा महत्व है।आज के विज्ञान से प्राचीन विज्ञान बहुत आगे था। प्रथ महाराज के समय संस्कृति जलवायु सब बड़ियां थे
जैसे जैसे मनुष्य की सोच और निती बदली वैसे वैसे प्रकृति ने भी अपने स्वभाव में बदलाव कर दिया।आज मनुष्य के अंदर पशुवृती घुम रही है।हमारे विचार कर्म स्वभाव में बदलाव आगया है। बनना था इंसान और हम जाता पात मजहब में जकड़ कर बन गए। इस बीच भजन , आदत बुरी सुधार लो, बस हो गया भजन , दुनिया तुम्हें बुरा कहे पर तुम करो क्षमा, वाणी का स्वर सुधार लो बस हो गया भजन पर भक्तजन खुब थिरके। राक्षस कुमार हिरणाकश्यप और भक्त प्रह्लाद तथा नरसिंह अवतार
का सजीव चित्रण किया गया। महाराज श्री ने कहा कि जो पति को पतन से बचा ले उसे पत्नी कहते हैं और जो पति को धर्म के मार्ग पर लें जाती है वो धर्म पत्नी कहलाती है। उंची जाति हो और कर्म अधर्मी हो तो किस काम के। मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है। कथा में कृष्ण कन्हैया लाल की जयकार के साथ ही भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ। कथा विश्राम पर आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान रुपपुरा, आकली , आमलीभाट ,सरवानियां महाराज, जावद , बावल , लोद , गायरीयावास, चोकानखेड़ा, मैलानखेड़ा, रानीपुरिया सहित आस पास के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। कथा में श्रद्धालु की आस्था उमड़ रही है।

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