डोडाचूरा को लेकर MP सरकार की पॉलिसी जल्द लागू, 10 साल से परेशान अफीम किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है.. पढ़िए खास रिपोर्ट! डोडाचूरा पर मध्यप्रदेश सरकार की मास्टर पॉलिसी!

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जगदीश तिवारी
भोपाल/नीमच/ मंदसौर!
मध्य प्रदेश के हजारों किसानों के लिए पिछले एक दशक से गले की फांस बने डोडा चूरा के मुद्दे पर अब सियासत और प्रशासनिक गलियारों से राहत की बड़ी खबर सामने आ रही है। किसानों के सब्र का बांध टूटने और लंबे समय से चल रहे विरोध के बाद, अब मोहन यादव सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर एक फुल-प्रूफ एक्शन प्लान और मास्टर पॉलिसी तैयार करने में जुट गई है।
विधि विभाग (Law Department) और आबकारी विभाग (Excise Department) की संयुक्त टीमें इस हाई-प्रोफाइल नीति को अंतिम रूप देने के लिए मैराथन बैठकों में जुटी हैं। जल्द ही मध्य प्रदेश सरकार इस पर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला आने वाला है! इसी साल राज्य के हजारों अफ़ीम किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

क्या है पूरा मामला और क्यों फंसे हैं किसान:-
मध्यप्रदेश में अफीम उत्पादक जिलों के किसानों के लिए डोडा चूरा हमेशा से एक जटिल समस्या रहा है।
ठेके बंद: राज्य में वर्ष 2015-16 के बाद से डोडा चूरा के ठेके पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं।

एनडीपीएस एक्ट का शिकंजा: –
कानून के मुताबिक, इसे बाहर बेचने या पास रखने पर सीधा एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत गंभीर मामला दर्ज होता है, जिसमें 10 से 20 साल तक की सजा का प्रावधान है।

एक दशक का संघर्ष: पिछले 10 साल से किसान इस कानूनी उलझन और आर्थिक संकट के बीच पिस रहे हैं!

सरकार के टेबल पर चल रहे हैं ये दो बड़े विकल्प;/
सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, शासन स्तर पर इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए मुख्य रूप से दो प्रस्तावों पर मंथन चल रहा है:

नष्टीकरण (Destruction) का खर्च: –
यदि सरकार पूरे डोडा चूरा को अपने स्तर पर नष्ट कराती है, तो इसमें आने वाले भारी-भरकम खर्च का आकलन किया जा रहा है।

सरकारी खरीद और री-एक्पोर्ट रणनीति: -दूसरा और सबसे अहम विकल्प यह है कि क्या सरकार खुद किसानों से डोडा चूरा खरीदेगी? और यदि सरकार इसे खरीदती है, तो इसे बाहर या अन्य वैध माध्यमों से खपाने की क्या रणनीति होगी, इस पर मंथन जारी है।

किसानों में जगी उम्मीद की किरण:
पिछले कई सालों से किसान संगठन लगातार यह मांग उठा रहे थे कि डोडा चूरा के निपटारे के लिए सरकार कोई स्पष्ट नीति (Policy) बनाए। अब जबकि शासन स्तर पर विधि और आबकारी विभाग मिलकर इस पर रणनीति तैयार कर रहे हैं, तो किसानों को पूरी उम्मीद है कि 10 साल पुराना यह काला साया जल्द छंटेगा और उन्हें इस कानूनी आतंक से मुक्ति मिले
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