महोत्सव के प्रथम दिवस शास्त्रजी का जुलूस निकाला गया। चतुर्थ दिवस से कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ हुआ। वाचन के पांचवें दिन भगवान महावीर जन्मोत्सव बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज के सभी महानुभावों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भगवान महावीर के जन्म से पूर्व उनकी माता द्वारा देखे गए 14 स्वप्नों की बोलियां भी लगाई गईं।
आठवें दिन दोपहर में स्नात्र महापूजन का आयोजन किया गया। रात्रि में महाआरती एवं प्रभु भक्ति का आयोजन हुआ। पूरे आठ दिनों तक बालिका मंडल द्वारा प्रभु की सुंदर अंगरचना की गई।
पर्युषण पर्व की समाप्ति के पश्चात जीरन में श्रीसंघ का जुलूस निकाला गया। धार्मिक आयोजन के दौरान समाजजनों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा।
WhatsApp Group
Join Now
