सर्पदंश से बचाव एवं प्राथमिक उपचार संबंधी जानकारी : चिकित्सकों की अपील
मंदसौर 9 जुलाई 26 / मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. चौहान ने सर्पदंश के बचाव व उपचार संबंधी एडवाइजरी जारी की है उन्होंने बताया की वर्षा ऋतु के दौरान जिले में सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना रहती है। सर्पदंश की रोकथाम, समय पर उपचार एवं जनसामान्य को सही जानकारी होना आवश्यक है।
क्या करें : सर्पदंश होने पर रोगी को शांत रखें, घबराने न दें तथा उसे कम से कम हिलाएं-डुलाएं, घाव को स्वच्छ पानी से धोकर साफ कपड़े से ढक दें, रोगी को शीघ्र निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्था/अस्पताल पहुंचाएं, प्रभावित अंग को स्थिर रखें तथा अंगूठी, कड़ा, घड़ी, बेल्ट आदि निकाल दें क्योंकि सूजन बढ़ सकती है, यदि संभव हो तो साँप की पहचान सुरक्षित दूरी से करें, परंतु उसे पकड़ने या मारने का प्रयास न करें, सर्पदंश का प्रभावी उपचार केवल एंटी स्नेक वेनम (ASV) है, जो शासकीय चिकित्सालयों में उपलब्ध है, अधिकांश मृत्यु उपचार में विलंब के कारण होती है, अतः बिना देर किए चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।
क्या नहीं करें: घबराएं नहीं एवं झाड़-फूंक पर विश्वास न करें, दंश वाले स्थान को न काटें और न ही चूसें, दंश वाले स्थान पर कसकर पट्टी (Tourniquet) न बांधें, बर्फ, मिट्टी, तेल, रसायन या कोई घरेलू उपचार न लगाएं, स्वयं दवा न लें तथा किसी अप्रमाणित उपचार का उपयोग न करें।
सर्पदंश से बचाव: खेतों या बाहर जाते समय पूरे पैर ढकने वाले जूते पहनें, रात में हमेशा टॉर्च का उपयोग करें, घर एवं आसपास की झाड़ियाँ, घास तथा कचरा साफ रखें, चूहों की संख्या नियंत्रित रखें तथा खाद्यान्न सुरक्षित रखें, हाथ या पैर किसी बिल, पत्थर या झाड़ी में डालने से पहले सावधानी रखें।
सर्पदंश के सामान्य लक्षण: दंश स्थल पर तेज दर्द, सूजन, बेहोशी या चक्कर आना, अत्यधिक पसीना आना, उल्टी या मतली, सांस लेने में कठिनाई, पलकों का भारी होना, धुंधला दिखाई देना।

