24 तीर्थंकर समान 24 महात्माओं की पावन निश्रा में चीताखेड़ा से रंभावली तीर्थ तक निकला चतुर्विध संघ
चीताखेड़ा-8 जनवरी। परम पूज्य डहेलावाला समुदाय के स्वाध्याय प्रेमी आचार्य श्री जगच्चंद्र सूरीजी महाराजसाहेब, आचार्य श्री कल्पयश सूरीजी महाराजसाहेबआदि ठाणा 21एवं परम पूज्य साध्वीजी शासन ज्योति श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 3 की पावन निश्रा में चतुर्विध संघ गुरुवार को प्रातः 6 :30 बजे डीजे व ढोल ढमाकों के साथ श्री मुनि सुव्रत स्वामी जिनालय चीताखेड़ा से बड़े ही ठाट बाट से निकला ।
चतुर्विध संघ गांव के विभिन्न मार्गों से डीजे व ढोल ढमाकों के साथ जैन श्रावक श्राविकाएं नाचते झुमते हुए रमावली के लिए प्रस्थान किया। चतुर्विध संघ को हरि झंडी दिखाकर रवाना करने के लाभार्थी विनोद कुमार,विजय कुमार झातरिया, श्रीमती प्रिया - प्रमोद दलाल ने हरि झंडी दिखाकर संघ को रवाना किया। रंभावली तीर्थ में प्रातः 10 प्रवेश किया। जहां नवकारसी के पश्चात् गुरुदेव के प्रवचन हुए जिसमें स्वाध्याय प्रेमी परम पूज्य आचार्य जगच्चचंद्र सूरिजी म.सा.ने धर्म सभा में उपस्थित जैन समुदाय को अपने मुखारविंद से जिनवाणी प्रवाहित करते हुए कहा कि भक्ति तत्व आत्मा तत्व है, भक्ति ही शक्ति है। भगवान की भक्ति से समाज को जोड़ती है,भक्ति में बहुत बड़ी शक्ति है।
परम् पूज्य आचार्य कल्पयश सूरिजी म.सा.ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि परमात्मा के प्रति समर्पण समर्पित रहने से कभी आपत्ति नहीं आती है। जो सुख में सुमिरन करता है उनके जीवन में कभी कष्ट नहीं आ सकते हैं। पंन्यास प्रवर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर केसरीमल -लख्मीलाल बंडी ने गुरु पूजन एवं संजय कुमार – रतनलाल मेहता ने आचार्य श्री जी को कमली ओढ़ाने की बोली का लाभ लिया। तत्पश्चात सभी साधर्मिकबंधुओं ने स्वामी वात्सल्य किया गया।
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