ग्राम झांतला में आत्मा योजना अंतर्गत प्रगतिशील पशुपालकों की संगोष्ठी संपन्न।

ग्राम झांतला में आत्मा योजना अंतर्गत प्रगतिशील पशुपालकों की संगोष्ठी संपन्न।

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ग्राम झांतला में आत्मा योजना अंतर्गत प्रगतिशील पशुपालकों की संगोष्ठी संपन्न।

नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य एवं पशु पोषण के बारे में बताया गया।

ग्राम झांतला में सामुदायिक भवन पर पशु पालन एवं डेयरी विभाग नीमच एवं परियोजना संचालक आत्मा नीमच द्वारा संयुक्त रूप से पशुपालकों की संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में जनपद प्रतिनिधि राजेश शर्मा, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष शांतिलाल धाकड़ ,किसान शंभू लाल धाकड़ ,पूर्व उपसरपंच प्रकाश पटेल, डॉ.राजेश पाटीदार, उप संचालक पशु पालन एवं डेयरी विभाग जिला नीमच ,डॉ.ए.आर.धाकड अतिरिक्त उपसंचालक नीमच ,डॉ.सी. एल. मालवीय विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी जावद ,डॉ.बी.एल.भारती गोस्वामी जावद, द्वारा गौ माता व,श्री कृष्ण भगवान के चित्र पर माल्या अर्पण अगरबत्ती गुलाल लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
इस अवसर पर उपसंचालक डॉ. राजेश पाटीदार ने कहा कि सरकार व शासन द्वारा पशुपालन व उनके उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई तरह की विभागीय हितग्राहीमूलक योजनाएं संचालित की जा रही है। लेकिन जानकारी के अभाव में किसान व पशुपालक इनका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। पशुपालन एक ऐसा व्यवसाय है, जो आमदनी का मुख्य स्रोत साबित हो सकता है व गाय का दूध अमृत से भी बढ़कर माना गया है। खेत से निकलने वाला हर अपशिष्ट पदार्थ पशुओं के लिए चारे का काम करता है। और पशुओं द्वारा निकलने वाला अपशिष्ट पदार्थ खेत मैं फसलों के लिए खाद,व औषधि का काम करता है। हमें उर्वरक की जगह जैविक खाद का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना चाहिए।
इस अवसर पर डॉक्टर आसाराम धाकड़ अतिरिक्त उप संचालक नीमच ने कहा कि किसान व पशुपालक पशु पालन,को कैसे अपनी आमदनी बनाने का मुख्य स्रोत बन सकता है। उसके लिए हमें अच्छी नस्ल की पैदावारी करना बहुत जरूरी है। इसके लिए कृत्रिम गर्भाधान से हम अच्छी नस्ल पैदा कर सकते हैं। पशुओं से संबंधित देखरेख खान पान,
रख,रखाव व शासन के द्वारा पशुपालकों को मिलने वाली हर जानकारी को बारीकी से किसानों को अवगत करवाया। व पशुधन से गोमूत्र से लेकर गोबर तक के उपयोग के बारे में बताया।
इस अवसर पर जनपद प्रतिनिधि राजेश शर्मा ने कहा कि पशुपालन बहुत ही फायदे व लाभ का व्यवसाय बन सकता है। पशुपालन की हर चीज का उपयोग होता है। गाय का दूध अमृत से भी बढ़कर माना गया है। वर्तमान परिपेक्ष में युवा पीढ़ी पशुपालन की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। यह बड़े खेद का विषय है। पशुपालन से आज का युवा स्वरोजगार पैदा कर सकता है। हमारे पुरखों ने जो परिपाटी चलाई हम उसे जीवित रखें वह ज्यादा से ज्यादा पशुपालन कर समृद्ध बन सकते हैं।
स्वागत भाषण डॉ बी.एल. भारती गोस्वामी,द्वारा दिया गया। आभार अभिव्यक्ति डॉ. सी.एल.मालवीय द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में विकासखंड के समस्त सहायक पशुचिकित्सा क्षेत्र अधिकारी,एवं कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता तथा विकासखंड के प्रगतिशील पशुपालक उपस्थित रहे ।

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