संत श्री मणिमहेश चैतन्य जी ने शिवना नदी प्राकट्य स्थान पर मंदिर पुनर्निर्माण कार्य का अवलोकन किया
मंदसौर – टीम एवीएस द्वारा लगातार 3 वर्षों से सीमा नदी प्राकट्य स्थान गांव सेवना राजस्थान से मंदसौर पशुपतिनाथ तक एक पैदल यात्रा का आयोजन किया जा रहा है इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र में नदी के प्रति जन जागृति आए जिसका परिणाम यह हुआ की 100% आदिवासी क्षेत्र गांव सेवना जो की शिवना नदी का प्राकट्य स्थान है वहां पर आदिवासी समाज में जन जागृति आई। शिवना नदी के प्राकट्य स्थान पर भागीरथ शिव मंदिर और गंगा घाट हैं जिसमें गंगा घाट तो मिट्टी में दब चुका लेकिन भागीरथ शिव मंदिर जो कि हजारों वर्ष पुराना एक प्राचीन मंदिर है। जीर्णक्षिण अवस्था में था तो ग्राम वासियों को जगाने का कार्य किया और ग्राम वासियों से आग्रह किया कि अपन सब मिलकर इस मंदिर का पुनर्निर्माण करेंगे जिस पर वहां पर स्थानीय लोगों की एक समिति का निर्माण हुआ फिर वहां पर कावड़ यात्रा का भी आयोजन हुआ और शिव महापुराण कथा का भी आयोजन हुआ जिसके परिणाम स्वरुप कुछ राशि इकट्ठी हुई और मंदिर पुनर्निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ । मंदिर निर्माण को लेकर मंदसौर क्षेत्र के संत श्री मणिमहेश चेतन जी भी सक्रिय थे उनकी भी हार्दिक इच्छा थी कि वहां पर मंदिर निर्माण हो तो गुरु मणि महेश चेतन जी टीम एवीएस संस्थापक मनीष भावसार के साथ शिवना नदी के प्राकट्य स्थान पर गए और उन्होंने मंदिर निर्माण का अवलोकन किया तथा क्षेत्र का भी अवलोकन किया जिसको देखते हुए मणिमहेश चेतन जी ने कहा कि यह एक अद्भुत स्थान है और बहुत ही प्राचीन स्थान है और मेरी आंखों का यही है कि यहां पर आने वाले समय में एक तीर्थ स्थान बनेगा और जो भी भक्त होरी हनुमान जी दर्शन करने के लिए आएंगे चाहे वह प्रतापगढ़ जिले के हो या मंदसौर जिले के उनके मन में ऐसी भावना जगेगी की क्यों न होरी हनुमान जी दर्शन करने के लिए आए हैं तो क्यों ना शिवना नदी के प्राकट्य स्थान के भी दर्शन हम करें और आने वाले समय में यह एक तीर्थ का रूप लेगी । निश्चित रूप से आप लोगों का प्रयास सराहनिय है आगे अपने आदिवासी समाज में आदिवासी शब्द की भी परिभाषा व्यक्त करी जिसमें कहा है कि जैसे आदि शंकराचार्य यानी कि पहले शंकराचार्य आदि योगी यानी की सबसे पहले योगी और आदिवासी यानी कि जो भगवान के साथ आया वह आदिवासी । जिस पर आदिवासी समाज ने ताली बजाकर गुरुदेव का स्वागत किया इसके पश्चात समिति के अध्यक्ष गोविंद मीणा ने मंदिर निर्माण की रूपरेखा राखी और आगे की योजना बनाई और गुरुदेव का मार्गदर्शन भी चाहा गया जिसमें गुरुदेव ने मंदिर निर्माण के लिए अपने विचार भी व्यक्त किये। इसके पश्चात गुरुदेव का सम्मान श्रीफल द्वारा मंदिर समिति के द्वारा किया गया और गुरुदेव के प्रवास की जानकारी टीम एवीएस के संस्थापक मनीष भावसार द्वारा रखी गई आगे जब गुरुदेव को अन्य धार्मिक स्थान देखने के लिए कहा लेकिन वहां पर रास्ता नहीं होने पर गुरुदेव पैदल ही उस स्थान को देखने के लिए गए और जैसे ही उन्होंने 24 खंबा मंदिर देखा तो बड़े ही प्रसन्न हुए की यह तो एक धार्मिक नगरी है और इस स्थान को देखकर मेरा मन बहुत ही प्रसन्न है 24 खंबा मंदिर में 40 , 50 वर्षों पूर्व शिवलिंग की चोरी हो गई थी उसे शिवलिंग का भी पता लगाकर उसे पुन उसे स्थान पर स्थापित करने के लिए गुरुदेव ने सभी आदिवासी समाज से आग्रह किया और गुरुदेव ने कहा कि इस मंदिर का भी पुनः निर्माण किया जाए और जो भी सहयोग होगा मैं समाज से और सभी से सहयोग दिलाने के लिए आश्वासन भी दिया गया उक्त जानकारी टीम एवीएस के संस्थापक मनीष भवसागर द्वारा
दी गयी।उक्त कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वरसिंह मीणा, सूरजमल मीणा, कैलास मीणा, शंकर मीणा, राम लाल मीणा, राम चन्द्र मीणा कांता मीणा, दिनेश विश्वकर्मा गांव भालोट आदि उपस्थित थे।