मुस्लिम त्योहारों पर जावद बंद की परंपरा बराकर,दस वर्षों से नहीं खुले बाज़ार।

मुस्लिम त्योहारों पर जावद बंद की परंपरा बराकर,दस वर्षों से नहीं खुले बाज़ार।

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मुस्लिम त्योहारों पर जावद बंद की परंपरा बराकर,दस वर्षों से नहीं खुले बाज़ार।

जावद। इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस को मुस्लिम समाज ने सोमवार को ईद मिलादुन्नवी के रूप में मनाया जाता है।सोमवार को ईद मिलादुन्नवी का त्यौहार मुस्लिम घरों में बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया।साथ ही समाजजनों द्वारा जुलूस का आयोजन भी हुआ। मुस्लिम समाज के लोगो ने एक दूसरे को गले मिलकर मुबारक बाद दी। वही दूसरी और लगातार 10 वर्षों से नहीं खुल रहे जावद के बाज़ार,हिंदू समाज द्वारा रखा गया सार्वजनिक बंद
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 17 सितंबर को मुस्लिम धर्म के लोगों मिलादुन्नवी का त्यौहार मनाया गया।
इस दौरान नगर पूरी तरह बंद रहा।मुस्लिम त्योहारों पर हिंदू समाज द्वारा बंद का यह दौर लगातार दस वर्षों से निरंतर जारी है।
बंद का यह क्रम वर्ष 2015 से हनुमान जयंती के दिन से प्रारंभ हुआ। जावद शहर जब हनुमान जयंती का उत्सव भव्य रूप से मनाया जा रहा था और शोभा यात्रा नगर में भ्रमण कर रही थी इसी दोरान शोभायात्रा खुर्रा चौक से निकल रही थी पर कुछ उपद्रवी तत्वों ने जुलूस पर पथराव कर दिया था। इस घटना के बाद में हिंदू समाज के मन में विरोध की भावना प्रकट हुई और हिंदू समाज द्वारा हर मुस्लिम त्यौहार पर नगर में व्यवसाय बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाता है हिंदू समाज द्वारा त्योहारों पर बिना किसी आह्वान के शत-प्रतिशत बंद रहता है।
इस दौरान चौक चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा।
कई बार प्रशासन द्वारा किए गए बाज़ार खुलवाने के प्रयास।
वर्ष 2015 के बाद शहर के व्यापार-व्यवसाय को खुलवाने के लिए प्रशासन ने कई बार प्रयास किए पर कभी सफलता नहीं मिली है कई सामाजिक संगठनों और मुस्लिम समुदाय के लोग भी यह प्रयास किए गए पर अभी तक सफलता नहीं मिली है।

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