गौवंश को बचाना है तो मानसिकता बदलनी होगी-बाल विदुषी हिमांशी जी

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गौवंश को बचाना है तो मानसिकता बदलनी होगी-बाल विदुषी हिमांशी जी

इंदिरा आवास कालोनी में तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा का आज अंतिम दिन,महाप्रसादी,हवन पूजन के साथ होगी पूर्णाहुति

चीताखेड़ा - गौमाता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है, गौमाता समुद्र मंथन से प्रकट हुई है। गायों के प्रति जन चेतना का अभाव है, गोवंश को बचाना है तो मानसिकता बदलनी होगी । गाय को निराश्रित पशु मान लेने या फिर माता का दर्जा देने की बातें सतही है। इनमें गोवंश का उद्धार होने वाला नहीं है।
       उक्त वाणी कथा वाचिका 9 वर्षीय साध्वी बाल विदुषी सुश्री हिमांशी जी ने चीताखेड़ा गांव के इंदिरा आवास योजना कालोनी में स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर पर  मंदिर निर्माण समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा महोत्सव ज्ञान गंगा की सरिता का प्रवाह करते हुए शनिवार को अपने मुखारविंद से प्रवाहित करते हुए कहीं। कहा कि दूध धोने के बाद गोपालक ही गायों को चढ़ाने के लिए छोड़ देते हैं यह फिर विचरण करती हुई पेट भरने के खातिर गली कुंचियो में पोलिथिन खाती फिरती है। ठिठुरन भरी कंपकंपाती ठंड में भी श्रद्धालुओं का सैलाब कथा के प्रति जज्बा इतना है कि शीतलहर की परवाह किए बगैर उमड़ रहा है श्रद्धालुओं के सैलाब।  प्रथम दिन ही ऐसा उमड़ा जनसैलाब की पंडाल भी छोटा पड़ गया। 
   गंगेश्वर महादेव मंदिर समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथा वाचिका बाल विदुषी सुश्री हिमांशी जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण एवं नानीबाई के पिता महान भक्त नरसिंह जी के जीवन से जुड़े मार्मिक प्रसंगों का वर्णन करते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को ज्ञान गंगा का रसास्वादन करवाते हुए कहा कि किस प्रकार भक्त नरसिंह ने जीवन की घोर विपत्तियों के बावजूद भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। अपने पास एक फूटी कोड़ी नहीं होने पर भी वह कुछ साधुओं को साथ लेकर नानी बाई के यहां 56 करोड़ का मायरा भरने निकल पड़े। कहां की सच्चा भक्त वही है जो संकट के समय भी विचलित न होकर भगवान पर अटूट विश्वास बनाए रखना है। भक्त नरसिंह की यह कथा हमें सिखाती है कि जब मनुष्य पूर्ण श्रद्धा व समर्पण भाव से भगवान की शरण में जाता है तब स्वयं भगवान उसके सम्मान की रक्षा करते हैं। 

बाल विदुषी सुश्री हिमांशी जी ने कथा में मायरा का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई और पूरा पंडाल भक्ति में हो उठा। कथा के दौरान भजनों पर भक्ति नृत्य करते हुए नजर आए।
आज राजस्थान के सुबी गांव के चारभुजा मंदिर सुबी श्याम से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जन नानी बाई का मायरा लेकर आएंगे।

इन्होंने की शिरकत
तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो कथा महोत्सव में दुसरे दिन की कथा में आवरी माताजी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष मनसुख जैन, सचिव राजेश जैन, पत्रकार दशरथ माली, जुगल किशोर भटनागर,कारुलाल परमार, नागेश्वर जावरिया, अशोक झातरिया तथा दक्षिण मंडल पूर्व अध्यक्ष मधुसूदन राजोरा, शांतिलाल जैन ने पहुंचकर कथा श्रवण की और व्यासपीठ पर पहुंचकर पौथी पूजन कर कथा वाचिका बाल विदुषी हिमांशी जी को माला पहनाकर स्वागत किया। कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।

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