मनुष्य जीवन चिंतामणि रत्न के समान कीमती है।
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज
झांतला। श्री भेरुनाथ की नगरी व विशुद्ध नगर झांतला में 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 27 साल के लंबे अंतराल के बाद सहसंघ 36 पिछी के साथ झांतला की पावन धरा पर पधारे जिसका ग्राम झांतला की सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा भव्य अभिनंदन व स्वागत किया गया ग्राम में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए वह आचार्य श्री का जगह-जगह पाद् पक्षालन किया गया। सहसंघ बैंडबाजो व ढोल ढमाको के साथ नगर में प्रवेश किया गया जैन अनुयाई नाचते गाते आचार्य श्री को झांतला की पावन धारा में मंगल प्रवेश करवाया।
इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि।
तीर्थंकर ,जिनवाणी की देशना यही है। कि आप अर्थ पूर्वक धर्म पुरुषार्थ करें तभी मोक्ष पुरुषार्थ का ध्येय प्राप्त होगा ।भगवान की भक्ति सच्चे मन से करने पर जन्म मरण आवागमन रूपी दुख दूर होते हैं। उससे छुटकारा मिलता है। मनुष्य जीवन बहुत कीमती है। आत्महत्या करना गलत है। विद्यार्थी कम नंबर आने से आत्महत्या करते हैं। मनुष्यजीवन चिंतामणि रत्न के समान कीमती है। आत्महत्या करने से जीवन छोटा होता है। आचार्य श्री ने आगे बताया कि इसी प्रकार गर्भपात कराना भी गलत है। जैन धर्म में इसे श्रेष्ठ नहीं माना गया है। इसलिए आपको मनुष्य जीवन में धर्म और अधर्म को समझना चाहिए ।अकाल मृत्यु होती नहीं है। पिछले जन्म के कारण अल्प आयु मिलती है।यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने नगर प्रवेश पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। इसके पूर्व 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 27 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद ससंघ 36 पीछी की चरण रज से धर्म नगरी झांतला में 20 मई मंगलवार को मंगल प्रवेश हुआ ।आचार्य संघ का सिंगोली होते हुए अतिशय क्षेत्र बिजौलिया राजस्थान की ओर मंगल विहार चल रहा हैं। आचार्य श्री के आगमन पर विशाल शोभा यात्रा में जगह जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती की। सभी उम्र के भक्त नृत्य कर भक्ति प्रदर्शित कर रहे है नगर के दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दर्शन किए आपके सानिध्य में श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा हुई।
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