गौमाता को लाप्सी रोटी आदि नैवेद्य का भोग लगाने से नवगृह हो जाते है अनुकूल और देते है आशीर्वाद- गौभक्त प.भीमाशंकर शास्त्री

गौमाता को लाप्सी रोटी आदि नैवेद्य का भोग लगाने से नवगृह हो जाते है अनुकूल और देते है आशीर्वाद- गौभक्त प.भीमाशंकर शास्त्री

मंदसौर

Shares

गौमाता को लाप्सी रोटी आदि नैवेद्य का भोग लगाने से नवगृह हो जाते है अनुकूल और देते है आशीर्वाद- गौभक्त प.भीमाशंकर शास्त्री

मन्दसौर। गौमाता को कराया गया आहार केवल गौमाता के मुख में नहीं बल्कि समस्त देवी देवताओं के मुख में जाता है। सांवलिया गौशाला कुंचड़ौद में भागवत प्रवक्ता परम् गौ भक्त पं. भीमाशंकर शर्मा ‘‘शास्त्री’’ ने गौमाता को लाप्सी का आहार कराते वक्त कहा। आहार कराने से पूर्व वैदिक विधि विधान से मंत्रोच्चार के साथ गौमाता का पूजन किया।
इस अवसर पर श्री चारभुजानाथ मंदिर के महंत प.पू. संतदासजी महाराज, गौशाला समिति तथा आयोजन समिति के सदस्य एवं ग्रामवासी भी सहभागी हुए।
पूज्य शास्त्रीजी ने कहा कि गौमाता का कराया गया आहार केवल गौमाता के मुख में ही बल्कि समस्त देवी देवताओं और भगवान नारायण के मुख में जाता है। आपने कहा गौमाता को लाप्सी, रोटी आदि नैवेद्य का भोग लगाने से नवगृह देवता हमारे अनुकुल होकर हमें आशीर्वाद देते है।
आपने कहा  जो गौमाता को पशु समझते है वह बड़ी भूल करते है। गौमाता कोई पशु नहीं है जिसमें 34 करोड़ देवताओं का निवास हो, जिसकी प्रार्थना पर समय-समय पर भगवान ने अवतार लेकर रावण, कंस जैसे दुष्टों और आतताईयों का संहार किया है वह पशु कैसे हो सकता है। देशी गौ माता को ‘‘गावो विश्वस्य मातरः’’ कहा गया है अर्थात देशी गाय समस्त विश्व की माता कहलाती है। इसलिये यदि अपने घर पर गौमाता पालने की व्यवस्था न हो तो जहां भी गौशालाएं हो वहां जाकर गौमाता को लाप्सी, रोटी का नैवेद्य और चरी, हरी घास आदि का आहार अवश्य कराना चाहिए।
गौमाता को नित्य आहार कराने वाले को किसी बात की कमी नहीं रहती। गौमाता के आशीर्वाद से घर में सुख शांति व समृद्धि बनी रहती है। इसलिये गौशालाओं में जाकर गौमाता के दर्शन अवश्य करना चाहिए।
आपने कहा कि नित्य प्रतिदिन गौमाता के दर्शन कर कम से कम 10 मिनिट तक उसकी पीठ पर हाथ फैरते है तो कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से बच जाते है।
उल्लेखनीय है कि गौशाला के निमित्त गांव कुंचड़ौद की गौशाला में पूज्य गुरूदेव भीमाशंकरजी की 11 जून से आयोजित भागवत कथा में व्यासपीठ पर विराजित होकर कथा प्रारंभ करने से पूर्व प्रतिदिन गौशाला में जाकर गौभक्तों के सहयोग से गौमाता को लाप्सी, गुड़, खोपरा गोला का आहार कराते है।
कथा प्रतिदिन दोप. 12 से अपराह्न 4 बजे तक होती है। समापन 17 जून को होगा। समिति द्वारा अधिक से अधिक संख्या में पधारकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की है।

ALSO READ -  बेहतर सुविधाओं के बीच आम और खास ने किया मतदान

ये भी पढ़े – हृदय रोग से ग्रसित 6 बच्चों की सर्जरी निःशुल्क होगी

Shares
WhatsApp Group Join Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *