खंडवा के काले परिवार को गौरैया संरक्षण के लिए कलेक्टर ने भेजा प्रशस्ति पत्र

खंडवा के काले परिवार को गौरैया संरक्षण के लिए कलेक्टर ने भेजा प्रशस्ति पत्र

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खंडवा के काले परिवार को गौरैया संरक्षण के लिए कलेक्टर ने भेजा प्रशस्ति पत्र

घर की छत को बनाया गौरैयाओं का सुरक्षित आश्रय, पर्यावरण प्रेम की मिसाल बना ‘मन गार्डन’

प्रकृति से प्रेम जब समर्पण में बदलता है, तो उसका प्रभाव केवल एक घर तक सीमित नहीं रहता—वह पूरे समाज को प्रेरणा देने लगता है। खंडवा के दादाजी वार्ड निवासी मुकेश काले और उनके परिवार ने अपने घर की छत को ‘मन गार्डन’ के रूप में विकसित किया है, जो आज गौरैयाओं और अन्य पक्षियों का सुरक्षित और आत्मीय आश्रय बन गया है।

इस प्रेरणादायक कार्य के लिए कलेक्टर खंडवा श्री ऋषव गुप्ता द्वारा  8 अप्रैल को काले परिवार के नाम प्रशस्ति पत्र भेजा गया, जिसे पटवारी श्री अशोक सिंह तंवर के माध्यम से उनके निवास स्थान पर प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुकेश काले की पत्नी पूर्णिमा काले, बहू विनीता काले तथा पुत्र अर्थव काले भी उपस्थित रहे।

कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने प्रशंसा में लिखा:

“प्रकृति संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में आपके परिवार द्वारा किया गया यह कार्य अत्यंत प्रशंसनीय है। यह समाज को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक प्रयास है। जिला प्रशासन सदैव इस प्रकार के प्रयासों के साथ खड़ा रहेगा।”

‘मन गार्डन’ बना गौरैयाओं का घर

मुकेश काले ने लगभग दस वर्षों की मेहनत से अपनी छत को हरियाली, लकड़ी के छोटे घरों, दाना-पानी और छायादार स्थानों से सजाया है। अब यह स्थान न सिर्फ गौरैयाओं बल्कि अन्य पक्षियों के लिए भी एक स्वर्ग जैसा बन गया है। उनकी पत्नी पूर्णिमा काले, बहू विनीता काले, और बेटे आदित्य व अर्थव इस सेवा में पूरी निष्ठा से लगे हुए हैं।

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पूर्णिमा काले कहती हैं, “अब गौरैया हमारे परिवार का हिस्सा बन गई हैं। उनकी चहचहाहट से दिन शुरू होता है और शाम को लौटती हैं, जैसे ये हमारे अपने घर की सदस्य हों।” 

पर्यावरण प्रेम: जीवनशैली में रचा-बसा संकल्प

जब स्त्रियाँ मायके जाती हैं, तो अक्सर कपड़े, उपहार या पसंदीदा वस्तुएँ साथ ले जाती हैं। लेकिन श्रीमती पूर्णिमा काले का मायके जाना एक अलग ही प्रेरणा देता है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा है कि वे आज जब अपने मायके इंदौर गईं, तो साथ ले गईं पौधे, कलमें और हरियाली की सौगात। उनका मानना है कि जहाँ भी रहें, वहाँ हरियाली और प्रकृति की सुंदरता ज़रूर हो। यह सोच ही ‘मन बगिया’ की आत्मा है, और यही भावना उन्हें हर स्थान को प्रकृति से जोड़ने की प्रेरणा देती है।

मित्र भी हुए प्रेरित

मुकेश काले के मित्र हेमंत मोराने बताते हैं कि मुकेश भाई ने यह साबित कर दिया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। उनका यह कार्य न केवल पर्यावरण प्रेम की मिसाल है, बल्कि हम सभी के लिए प्रेरणा भी है।

प्रकृति संरक्षण की ओर एक प्रेरक संदेश

काले परिवार की यह पहल आज पूरे खंडवा में चर्चा का विषय बन गई है। यह दिखाता है कि यदि संकल्प हो तो प्रकृति से जुड़ाव फिर से स्थापित किया जा सकता है। प्रकृति से जुड़ाव ही सच्चे समृद्ध जीवन की नींव है।

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