भारतीय संस्कृति के अनुरूप दीपावली के दूसरे दिन महिलाओं ने की गोवर्धन पूजा

भारतीय संस्कृति के अनुरूप दीपावली के दूसरे दिन महिलाओं ने की गोवर्धन पूजा

नीमच क्षेत्रीय खबरें

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भारतीय संस्कृति के अनुरूप दीपावली के दूसरे दिन महिलाओं ने की गोवर्धन पूजा

कुकड़ेश्वर – भारतीय संस्कृति में भारतीय हिन्दू समाज का दीपावली पर्व सबसे बड़ा पर्व माना जाता है पांच दिवसीय इस महापर्व पर भारतीय संस्कृति में हर दिन का एक अलग महत्व है धनतेरस से प्रारंभ होकर भाई दूज पर समाप्त होने वाले इस पर्व पर लक्ष्मी पूजन के दूसरे दिन लोहार मोहल्ला कुकड़ेश्वर में महिलाओं द्वारा शहरो से विलुप्त हो रही गौवर्धन वावजी बनाने की प्रथा को पुन प्रारंभ करते हुए भारतीय परंपरा अनुसार गोबर के गोवर्धन बावजी का निर्माण कर इसकी पूजा अर्चना की गई इस अवसर पर स्थानीय महिलाओ के साथ श्रीमती मंजू सोनी ने बताया कि कहा जाता है बृजवासी इंद्र की पूजा करते थे तब भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि हमें गौ माता ,नन्दी ,गोवर्धन पर्वत की पूजा अर्चना करना चाहिए क्योंकि यह हमें धन-धान्य से भरपूर रखते हैं इस बात पर इंद्र नाराज हो गए और बहुत अत्यधिक मात्रा में बरसात करके ब्रज वासियों का जीना हराम कर दिया भगवान श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गौ धन और बृजवासियों की रक्षा की तब से आज तक यह परंपरा चली आ रही है गोवर्धन बावजी की पूजा करने से सुख समृद्धि वैभव की प्राप्ति होती है इस परंपरा का निर्वहन करते हुए श्रीमती मंजू सोनी, श्रीमती सरोज लोहार,श्रीमती रामकन्या बाई श्रीमती दुर्गा लोहार, श्रीमती टीना लोहार के साथ अनेक महिलाएं उपस्थित थी सभी ने मिलकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि वैभव की कामना की आसपास की गौशालाओं में भी गौ माता गोवर्धन बावजी की पूजा अर्चना की गई।

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