कथा के दूसरे दिन भगवान के 24 अवतारों का वर्णन सुन भावुक हुए श्रद्धालू

कथा के दूसरे दिन भगवान के 24 अवतारों का वर्णन सुन भावुक हुए श्रद्धालू

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अथवा खुर्द में बह रही भक्ति की रस धारा,

कथा वाचक पंडित राजेश राजोरा महाराज के प्रवचन से भक्त हो रहे ओत प्रोत,

कथा के दूसरे दिन भगवान के 24 अवतारों का वर्णन सुन भावुक हुए श्रद्धालू,

सिंगोली- नीमच सड़क मार्ग पर स्थित अथवा खुर्द के राम जानकी सराय प्रांगण में इन दिनों तीर्थ धाम जैसा नजारा दिख रहा है । जंहा विशाल पांडाल में दर्जनों गांवों के भक्तगण श्रीमद भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ का पाठ सुनने आ रहे हैं। यंहा प्रदेश के सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित राजेश राजोरा जी महाराज की कथा सुनने सैकड़ो श्रद्धालु पहुच रहे है . ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र व भगवान के जयकारे लगातार लग रहे है . कथा के दौरान राधे राधे की गूंज पूरे इलाके में गूंज रही
श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन पंडित राजेश राजोरा महाराज ने बताया कि आज धर्म ऐसे संकट में है कि इंसान भगवान को भी बांटकर अपना बटवारा करने में लगा है ।
पंडित राजोरा ने यह भी बताया कि कथा जीवन परिवर्तन करने के लिए नही सिर्फ प्रभु के आंनद को पाने के लिए है. जब कथा में बैठो तो तब सब कुछ प्रभू पर छोड़ दो. चिंता इतनी करो कि उससे काम हो , इतनी नही की जिंदगी ही तमाम हो जाये .मस्त रहिए हरिनाम में व्यस्त रहिए।
पंडित राजोरा ने कथा के दौरान भगवान के 24 अवतारों आदि पुरुष , चार सनत कुमार , वराह नर-नारायण , कपिल दत्तात्रेय ,यज्ञ, ऋषभ , पृथु, मत्स्य कच्छप , धन्वन्तरि, मोहिनी , नृसिह कृष्ण , बुद्ध और कल्कि का वर्णन किया
कलयुग के आरंभ में पांडव कुल भूषण राजा परीक्षित के तपस्यारत शमीक ऋषि के गले मे सर्प डालने तथा ऋषि पुत्र के राजा को नाग द्वारा डसने की कथा सुनाई .वही ऋषियों के परीक्षित को श्राप से मुक्ति दिलाने का भी वर्णन किया ।

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पंडित राजोरा ने कथा में बताया कि दुनिया की हर चीज में मिलावट हो सकती लेकिन भगवान के नाम मे मिलावट नहीं हैl भगवान का नाम सदा शुद्ध है। इंसान को हर जगह धोखा हो सकता है। मगर राम, कृष्ण और शिव नाम मे कोई संशय नही है। जिस तरह औषधालय में औषधी मिलती है, वस्त्रालय में वस्त्र मिलते हैं। इसी तरह संसार दुखालय है जहां दुख ही मिलता है। इंसान को असली सुख राम नाम में ही मिल सकता है।सत्संग से मन शुद्ध होता है। सत्संग से बदल जाती है जीवन की धारा पंडित श्री राजोरा ने कहा कि संतो का सत्संग करने यह नहीं सोचना चाहिए कि हमें कोई बीमारी नहीं आएगी, हमारा परिवार खुशहाल रहेगा या फिर हमारा व्यापार अच्छा चल जाएगा, यह तो प्रारब्ध होता है जो इस दुनिया में आया है उसे एक दिन जाना ही है जब लाभ होता है तो हानि भी निश्चित होती है। सत्संग तो जीवन की धारा बदल देता है जिसमें आप ज्ञान और भक्ति की धारा में बहने लगते हैं, लेकिन यहां पर भी यदि कई बार लोग सत्संग करते हैं लेकिन उसका मूल नहीं समझ पाते, जिससे जीवन पर्यंत सत्संग करने के बाद भी अंत में उनको कुछ भी हासिल नहीं होता है।
श्रीमद भागवत कथा के बीच बीच मे संगीतमय भजनों की प्रस्तुतियां पर महिलाएं व बढ़चढ़कर नृत्य कर रही जिससे पूरा कथा पंडाल में भगवान के जयकारे बुलंद हो रहे थे।

महेंद्र सिंह राठौड़

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