स्वास्थ्य विभाग ने कुत्तों के काटने से बचाव, उपचार एवं टीकाकरण संबंधी जारी की एडवाइजरी

स्वास्थ्य विभाग ने कुत्तों के काटने से बचाव, उपचार एवं टीकाकरण संबंधी जारी की एडवाइजरी

मंदसौर

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स्वास्थ्य विभाग ने कुत्तों के काटने से बचाव, उपचार एवं टीकाकरण संबंधी जारी की एडवाइजरी

मंदसौर 10 जुलाई 26 / मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. चौहान ने कुत्तों
के काटने, उपचार एवं टीकाकरण के संबंध में एडवाइजरी जारी की है कि जिले में कुत्तों के काटने
(Dog Bite) की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। रेबीज एक 100% घातक, किन्तु
समय पर उपचार एवं टीकाकरण से पूर्णतः रोकी जा सकने वाली बीमारी है। अतः जनसामान्य में
जागरूक होना आवश्यक है।
क्या करें: कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को तुरंत कम से कम 15 मिनट तक बहते
पानी एवं साबुन से अच्छी तरह धोएं, घाव को धोने के बाद पोविडोन आयोडीन (Povidone-Iodine)
या अन्य उपयुक्त एंटीसेप्टिक लगाएं, बिना विलंब निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्था/अस्पताल में
जाकर चिकित्सकीय परामर्श लें, चिकित्सक की सलाह अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) एवं
आवश्यकता होने पर रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) अवश्य लगवाएं, यदि काटने वाला कुत्ता पालतू है
तो उसे 10 दिनों तक निगरानी में रखें तथा उसकी स्थिति की जानकारी चिकित्सक को दें, उपचार
एवं टीकाकरण का पूरा कोर्स निर्धारित समयानुसार अवश्य पूरा करें।
क्या नहीं करें: घाव पर मिट्टी, हल्दी, तेल, मिर्च, राख, गोबर या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं,
झाड़-फूंक या अप्रमाणित उपचार पर विश्वास न करें, घाव को कसकर न बांधें तथा बिना चिकित्सकीय
सलाह के टांके न लगवाएं, केवल छोटा घाव समझकर उपचार में लापरवाही न करें, टीकाकरण का
कोर्स बीच में न छोड़ें।
डॉग बाइट से बचाव: आवारा कुत्तों को न छेड़ें, पत्थर न मारें एवं उनके पास अनावश्यक न
जाएं, बच्चों को कुत्तों के साथ सुरक्षित व्यवहार की जानकारी दें, भोजन करते, सोते या अपने बच्चों
के साथ मौजूद कुत्तों को परेशान न करें, पालतू कुत्तों का नियमित एंटी-रेबीज टीकाकरण कराएं,
स्थानीय निकाय को आवारा कुत्तों की जानकारी दें तथा ABC (Animal Birth Control) एवं Anti-
Rabies Vaccination Programme में सहयोग करें।
रेबीज के संभावित लक्षण (उपचार न मिलने पर): बुखार एवं सिरदर्द, घाव के स्थान पर दर्द,
झुनझुनी या जलन,पानी पीने में कठिनाई (Hydrophobia), हवा से डर लगना (Aerophobia),
अत्यधिक उत्तेजना, बेचैनी एवं भ्रम, अंततः लकवा एवं मृत्यु।
महत्वपूर्ण संदेश: रेबीज के लक्षण प्रकट होने के बाद इसका कोई प्रभावी उपचार नहीं है,
इसलिए कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव धोना एवं समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण ही जीवन बचाने
का सबसे प्रभावी उपाय है।
शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में एंटी-रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकता अनुसार रेबीज
इम्यूनोग्लोबुलिन उपलब्ध कराया जाता है।

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