शंकुतला गर्ग ने समूह के माध्यम से प्राकृतिक जूस निर्मित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ी

शंकुतला गर्ग ने समूह के माध्यम से प्राकृतिक जूस निर्मित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ी

मंदसौर

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शंकुतला गर्ग ने समूह के माध्यम से प्राकृतिक जूस निर्मित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ी

अपने उत्पाद को प्रदेश के साथ अंतरराज्यीय मेलों में भी प्रदर्शित किया

समूह की कुल वार्षिक आय 3 से 5 लाख रुपये तक पहुंची

मंदसौर – म.प्र. डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विकासखण्ड मंदसौर के अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपलिया कराड़िया की महिला श्रीमती शंकुतला गर्ग ने आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। प्रभारी विकासखण्ड प्रबंधक श्री अलकेश कटलाना के मार्गदर्शन में यहां महाराणा स्व-सहायता समूह का गठन किया गया, जिसमें श्रीमती शंकुतला गर्ग को भी जोड़ा गया। समूह से जुड़ने के बाद शंकुतला ने अपने परिवार के सहयोग से प्राकृतिक जूस (शरबत) बनाने का कार्य शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने किसी प्रशिक्षण संस्था से नहीं, बल्कि यू-ट्यूब के माध्यम से प्राकृतिक जूस बनाने की विधि सीखी और छोटे स्तर पर उत्पादन प्रारंभ किया।

धीरे-धीरे उनके द्वारा बनाए गए जूस की मांग स्थानीय बाजार, हाट बाजार तथा राज्य स्तरीय मेलों में बढ़ने लगी। शंकुतला गर्ग ने अपने उत्पाद को प्रदेश और अंतरराज्यीय मेलों में भी प्रदर्शित किया। हाल ही में हरियाणा राज्य के गुड़गांव हाट बाजार में समूह द्वारा लगाए गए स्टॉल को स्थानीय प्रशासन और उपभोक्ताओं द्वारा काफी सराहा गया। मेले की अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें फोन के माध्यम से लगातार ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं। मात्र 15 दिनों के इस मेले से समूह को संतोषजनक आय हुई और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।

समूह को स्थानीय बाजारों से लगभग 50,000 रुपये, प्राप्त ऑर्डर से 80,000 रुपये, स्थानीय मेलों से 1,20,000 रुपये, राज्य स्तरीय मेलों से 1,50,000 रुपये तथा अंतरराज्यीय मेलों से 2 से 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार समूह की कुल वार्षिक आय लगभग 3 से 5 लाख रुपये तक पहुँच गई है।

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मिशन द्वारा समूह को 20,000 रुपये चक्रीय कोष (RF) एवं 75,000 रुपये सामुदायिक निवेश कोष (CIF) की राशि प्रदान की गई, जिससे समूह की महिलाओं को अपने व्यवसाय को और सशक्त बनाने का अवसर मिला। आज महाराणा स्व-सहायता समूह की दीदियां आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गई हैं।

यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और संकल्प हो, तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी अपनी मेहनत और लगन से बड़े स्तर पर पहचान बना सकती हैं।

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